चमरौली गांव का नजारा सुबह से ही बदला हुआ था। शाम को जैसे ही शहीर विजयभान सिंह का पार्थिव शरीर लेकर सेना का वाहन पहुंचा पूरा गांव भारत माता के जयकारों से गूंज उठा। गांव से करीब एक किलोमीटर पहले ही पार्थिव रखे वाहन को रोक लिया और तिरंगे से लिपटे शव के ताबूत को सम्मान के साथ कंधों पर ले लिया। करीब एक किलोमीटर दूर से ही सैकडों ग्रामीण और युवा पार्थिव शरीर को लेकर गांव तक आए। भारत माता के जयकारों के साथ तिरंगा लहरा था।
विज्ञापन
2 of 5
शहीद की अंतिम विदाई में उमड़ी नौजवानों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
शहादत को नमन करने के लिए आसपास के गांवों से सैकडों लोग चमरौली आ गए थे। हर किसी में अंतिम दर्शन कर पार्थिव शरीर पर पुष्प चढ़ाने की होड़ लगी थी। बांग्लादेश की कायर हरकत का हर जुबान पर विरोध था। सरकार से बदला लेने की बात लोग कह रहे थे। प्रशासन की अनदेखी पर
गुस्सा भी काफी था। भीड़ में से कई बार प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी हुई लेकिन गांव ही कुछ लोगों ने नारेबाजी करने से रोका।
विज्ञापन
3 of 5
शहीद के शव पर विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
अंत्येष्टि स्थल पर गुस्सा जताते हुए शहीद के साले ने कहा कि प्रशासन तीन दिन से आंखे बंद किए बैठा है। कोई सांत्वना तक देने नहीं आया। यह पूरी व्यवस्था हमने और ग्रामीणों ने मिल कर की है। प्रशासन ने कोई मदद नहीं की। देश के लिए शहीद हुए विजयभान सिंह के योगदान की भरपाई नहीं का जा सकती लेकिन सरकार और प्रशासन दुख की घडी में पीडित परिवार की मदद तो कर सकता है।
4 of 5
शहीद के शव पर विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
शहीद विजयभान सिंह का बेटा विवेक अंत्येष्टि स्थल पर अधिकारियों और भीड़ में मौजूद लोगों के हाथ ही जोड़ता रहा। बेटा का कहना था कि हम कोई विरोध नहीं जता रहे सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं। हमने किसी अधिकारी से अप्रिय बात नहीं कही है लेकिन आप ही बताएं मुख्यालय से हमारे गांव की दूरी दस मिनट की है। क्या अधिकारी हमारे परिवार को सांत्वना देने भी नहीं आ सकते थे।
बीएसएफ के जवान परिवार को हिम्मत देते हुए
- फोटो : अमर उजाला
शहीद विजयभान सिंह की पत्नी सुनीता देवी ने गुरुवार को करवाचौथ का व्रत रखा था। एक दिन पहले पति से फोन पर बात की थी। करवा चौथ होने के कारण हाथों पर मेहंदी भी लगाई थी। करवा चौथ पर ही पति के शहीद होने की खबर ने तोड़ दिया। करवा चौथ पर लगाई मेहंदी सुनीता के हाथों पर रची हुई थी। शहीद के पार्थिव शरीर के पास पहुंची सुनीता के हाथों पर मेहंदी देख लोगों की आंखें नम हो गईं। शहीद विजयभान के पार्थिव शरीर के साथ आए जवानों ने पूरे परिवार को हिम्मत और हौसला दिया।