देश पर शहीद होने वालों की जब भी याद आती है, तो आंखें खुद नम हो जाती हैं। कोई रिश्ता न होने के बाद भी उनकी कुर्बानी दिल में देशभक्ति का जज्बा जगा देती है। वो पत्थर दिल ही होते हैं, जिन्हें मां भारती के इन लाडलों की शहादत द्रवित न करे। अमर उजाला के अभिनव अभियान मां तुझे प्रणाम की शृंखला में आयोजित वीरांगना सम्मान समारोह में देशभक्ति का भाव दिखा।
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वीरांगना सम्मान समारोह
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
4-जाट रेजिमेंट के जांबाज सिपाही धाराजीत सिंह चाहर बहुत खुश थे, वह पहली बार पिता बनने वाले थे। मगर, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। संतान होने से पहले ही उनके शहीद होने की खबर घर आ गई। गर्भवती पत्नी ब्रजेश देवी को पता चला तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनकी शहादत के अगले ही दिन बेटी का जन्म हुआ।
धाराजीत 13 जनवरी 1989 को श्रीलंका में वावुुनिया-मन्नार मार्ग पर उग्रवादियों की निगरानी के लिए घात लगाकर बैठे थे। इसी दौरान उग्रवादियों काे आते देखा तो रुकने की चेतावनी दी। उग्रवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें उनके साथी घायल हो गए। उग्रवादी ने सिपाही की राइफल उठाने की कोशिश की तो धाराजीत ने रोका। ऐसे में उग्रवादी ने उन पर गोली चला दी और इसमें वह शहीद हो गए। उनको मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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वीरांगना सम्मान समारोह
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रक्त बहा दिया लेकिन दुश्मनों को अपनी माटी पर पैर नहीं जमाने दिए। विकट हालात आने पर भी पूरी जांबाजी से उनका लोहा लिया। शहादत की ये वीरगाथाएं सुन लोगोें की आंख से आंसू छलक पड़े। अमर उजाला के मां तुझे प्रणाम कार्यक्रम की शृंखला में बुधवार को वीरांगना सम्मान समारोह में ऐसे ही रणबांकुरों की 50 वीरांगनाओं को सम्मानित किया गया।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सिकंदरा स्थित डॉ. एमपीएस वर्ल्ड स्कूल के अतुल्य भारत कल्चरल सेंटर में हुए कार्यक्रम में वीरांगनाओं को स्मृति चिन्ह देते समय शहीदों के बलिदान को नमन भी किया गया। समारोह में आगरा, मथुरा समेत आसपास के जिलों की वीरांगनाएं और शहीदों के परिजन शामिल हुए।
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इसमें 1965, 1971, कारगिल युद्ध समेत विभिन्न ऑपरेशनों में शहीद रणबांकुरों को याद किया गया। संचालक डॉ. संजय बंसल ने शहीदों की बहादुरी का कुछ इस तरह जिक्र किया कि लोग देशभक्ति के जोश से भर गए। खड़े होकर लोग तालियां बजाते हुए जयकारे लगाने लग रहे थे। परिजन के संघर्ष को सुनकर हर किसी की आंख नम हो गईं।
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समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि पुलिस आयुक्त दीपक कुमार, विशिष्ट अतिथि एयर कोमोडोर एओसी सतीश गुप्ता, एमपीएस वर्ल्ड स्कूल के प्रबंध निदेशक व स्क्वाॅड्रन लीडर एके सिंह, फुटवियर एवं चर्म उद्योग विकास परिषद के चेयरमैन पूरन डावर, कर्नल जीएम खान (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल प्रताप दयाल, श्वेता गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।इसके बाद सभी ने वीरांगनाओं को सम्मानित करते हुए खुद को सौभाग्यशाली बताया।
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नहीं रुके कदम, बेटा चला पिता के नक्शे कदम
सीएमसी रेजिमेंट के सूबेदार इशेंद्र भदौरिया 2004 में शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के समय एक बेटा कक्षा 8 और दूसरा कक्षा 4 में था। बेटी इतनी छोटी थी कि स्कूल नहीं जाती थी। पति की शहादत के बाद पत्नी रजनी भदौरिया को ही परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेनी पड़ी। पति की शहादत के बाद उन्होंने अपने बेटे का सेना के लिए तैयार किया। अब बड़ा बेटा अतुल भी अपने पापा के नक्शे कदम पर चल रहा है। परिवार में अधिकतर लोग सेना में हैं और देश की सेवा में जुटे हैं। रजनी खुद एक आर्मी अफसर की बेटी हैं, इनके पिता भी 1971 की लड़ाई में शहीद हुए थे, उन्होंने अपनी बेटी की शादी भी एयरफोर्स में तैनात दामाद से की।
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सैनिक के बलिदान से शुरू होता है परिजन का संघर्ष
एयर कोमोडोर सतीश गुप्ता ने कहा कि सैनिक अपने परिवार और प्राणों की परवाह किए बिना ही देश के लिए शहीद होते हैं। उनका बलिदान अतुलनीय है। लेकिन सैनिकों के बलिदान से ही उनके परिवार की संघर्ष शुरू हो जाती है। पत्नी, माता-पिता, बच्चे ताउम्र संघर्ष करते हैं।
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वीरांगनाओं के कदमों से धन्य हो गया परिसर
डॉ. एमपीएस वर्ल्ड स्कूल के चेयरमैन स्क्वाॅड्रन लीडर एके सिंह ने कहा कि वह खुद सैनिक हैं और परिवार की स्थिति-परिस्थितियों को बखूबी समझते हैं। वीरांगना सम्मान समारोह के जरिये वीरांगनाओं को भी लगता है कि शहीदों के बलिदान को देश भूला नहीं है। हकीकत में इन वीरांगनाओं के कदमों से हमारा परिसर धन्य हो गया।
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अपने बेटों को सेना में भेजो फिर करो युद्ध की बात
एयर कोमोडोर सतीश गुप्ता की धर्मपत्नी श्वेता गुप्ता ने कहा कि शहीद का परिवार होना भी गर्व की बात है। लेकिन बेटा, भाई, पति के बलिदान के बाद परिजन का संघर्ष कोई नहीं देख पाता। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में कई लोग कहते थे कि मोदीजी को पाकिस्तान से युद्ध बंद नहीं करना चाहिए था। तो बता दूं कि सेना ने अपना काम कर दिया था। रही बात युद्ध की तो अपने बेटों को सेना में भेजो और फिर ये बात कहना।
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सम्मान पाकर यादें हो गईं ताजा
मंच से कई वीरांगनाओं का सम्मान किया गया। सम्मान से पहले उनके परिवार के शहीद को याद करते हुए उनकी गौरव गाथा भी सुनाई गई। कई वीरांगना मंच पर सम्मान पाते समय अपने आंसुओं को रोक नहीं सकी। अपने को खोने के गम के साथ मन में एक देश के लिए कुर्बान होने का गर्व भी इन वीरांगनाओं के चेहरों पर नजर आया।
वीरांगना सम्मान समारोह
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छाया देशभक्ति का रंग
देश के प्रति प्रेम ही था जो लोगों को कई घंटे तक आयोजन से जोड़े रखा। वीरांगना सम्मान समारोह की शुरूआत दोपहर करीब 1:30 बजे हुई। इसके बाद देशभक्ति की हवा ऐसी चली कि मौजूद हर शख्स अपनी कुर्सी पर बैठा ही रहा। चार घंटे तक चले समारोह में लोग देशभक्ति से ओतप्रोत दिखे।