भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में होली के इस अवसर पर हर कोई रंगों से सराबोर है। ऐसे में भला आश्रय सदनों में रहने वाली विधवा और निराश्रित महिलाएं भक्ति और कृष्ण प्रेम के इन रंगों से कैसे दूर रह सकती हैं। वृंदावन के गोपीनाथ मंदिर में आज विधवाओं ने अपने आराध्य के सामने होली खेली और उनकी भक्ति के रंग में खुद को रंग लिया।
टूट गईं परंपराएं
मथुरा के वृंदावन में सैंकड़ों वर्षों से चली आ रही परंपरा को तोड़कर सोमवार को आश्रय सदनों में रह रहीं विधवा और बेसहारा माताओं ने रंगों की होली खेल अपने बेरंग जीवन में रंग भरने का प्रयास किया। वृंदावन का राधा गोपीनाथ मंदिर सदियों पुरानी परंपरा के टूटने का फिर साक्षी बना। दोपहर को फूलों और गुलाल से खेली गई। इस होली के दौरान विधवा और बेसहारा माताओं का उत्साह उनकी खुशी का इजहार कर रहा था।
विधवाओं ने मंदिर प्रांगण में खेली होली
- फोटो : अमर उजाला
होली के गीतों की धुन पर नृत्य करतीं विधवाओं को देखकर ऐसा लग रहा था मानो वे अपने अतीत की जिंदगी के काले पल को पीछे छोड़ आईं हैं। होली में सैंकड़ों किलो विभिन्न प्रकार के फूलों के रंग बिरंगे गुलाल को उड़ाया गया।
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विधवाओं ने मंदिर प्रांगण में खेली होली
- फोटो : अमर उजाला
विधवाओं को मुख्यधारा से जोड़न का कार्य कर रही संस्था सुलभ इंटरनेशनल ने विधवा और बेसहारा माताओं के इसी प्रयास में सहयोगी बनकर सोमवार को वृंदावन के सप्त देवालयों में से एक राधा गोपीनाथ मंदिर प्रांगण में फूलों और गुलाल की होली महोत्सव का आयोजन किया गया।
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विधवाओं ने मंदिर प्रांगण में खेली होली
- फोटो : अमर उजाला
सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विंदेश्वर पाठक ने कहा कि विधवाओं की जिंदगी में नए रंग भरने का मौका लाकर सुलभ ने समाज को यह संदेश देने की कोशिश की है कि विधवा महिलाएं भी समाज का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जितने दूसरे लोग।
विधवाओं ने मंदिर प्रांगण में खेली होली
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि सुलभ इंटरनेशनल वृंदावन की विधवा और निराश्रित महिलाओं की ना सिर्फ देखभाल कर रहा है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। राधा गोपीनाथ मंदिर के सेवायत राजा गोस्वामी ने कहा कि इस दिव्य आयोजन का उनका मंदिर गवाह बना है।