रुनकता के ब्रह्माकुमारी आश्रम में गंदा काम चार साल से चल रहा था। जिस युवती के साथ दुष्कर्म होता था, उसे कई दिनों तक एक कमरे में बंद कर दिया जाता था, ताकि वह दूसरी युवतियों को आपबीती न सुना सके। भयभीत होकर पीड़ित युवती जब मुंह बंद कर लेती थी, तब उसे बाहर निकला जाता था। यह दर्दभरी दास्तां उस युवती ने सुनाई जिसने आश्रम संचालक भगवान सिंह के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया।
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रेनूका धाम स्थित आश्रम जहां युवती के साथ दुष्कर्म किया गया
- फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट दर्ज कराने वाली युवती ने पुलिस को बताया कि उसके साथ चार साल पहले दुष्कर्म किया गया। उसे कमरे में बंद कर दिया गया। दो दिनों तक खाना नहीं दिया। उसे धमकी दी गई कि अगर मुंह खोला तो जान से जाएगी। इस कारण वह चुप रही लेकिन उसने तभी भगवान सिंह से कह दिया था कि अगर दूसरी बार ऐसी करतूत की तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। कुछ दिन बाद उसने फिर से उसे हवस का शिकार बनाया। फिर वही किया, कमरे में बंद करना, भूखा रखना, धमकी देना। अन्य युवतियां भी इस शोषण और पीड़ा से गुजर चुकी थीं, इसलिए वे भी चुप रहती थीं।
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सिकंदरा स्थित रेनूका धाम पर बना आश्रम जहां युवती से दुष्कर्म हुआ
- फोटो : अमर उजाला
पीड़ित युवती ने बताया कि दो दिन पहले 23 जून को वह आश्रम से भागकर एक महिला के पास पहुंची थी। उस महिला के माध्यम से पुलिस तक सूचना पहुंचाई थी लेकिन पुलिस नहीं आई। उसे उम्मीद थी कि पुलिस कार्रवाई करेगी। इस पर वह आश्रम वापस चली गई। पुलिस नहीं आई तो मंगलवार को वह फिर से आश्रम से भाग आई। आश्रम शनिदेव मंदिर रोड पर है। वहां आसपास के लोगों को बताया। उन्होंने आरोपी को पकड़ा और पुलिस को सूचना दी।
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पुलिस की गिरफ्त में दुष्कर्म का आरोपी भगवान सिंह
- फोटो : अमर उजाला
आश्रम में और भी युवतियां रह रही हैं। कई जा चुकी हैं। सभी को डराया और धमकाया गया, इसलिए सब चुप रहीं। रिपोर्ट दर्ज कराने वाली युवती का कहना है कि आखिर कब तक अत्याचार सहन करती, उसने ठान लिया कि चाहें जान चली जाए, इसे (भगवान सिंह) को जेल भिजवाकर रहेगी। उसका कहना है कि वह चाहती है कि केस जल्द से जल्द कोर्ट में पहुंचे। उसकी जिंदगी का अब यही मकसद है कि वह भगवान सिंह को सजा दिलाकर रहेगी, चाहें उसकी जान ही क्यों न चली जाए।
रेनूका धाम में बना आश्रम जहां युवती से दुष्कर्म की घटना हुई
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस की देरी के सवाल पर रुनकता चौकी इंचार्ज का कहना था कि सूचना 23 को नहीं, मंगलवार को ही मिली। एएसपी हरीपर्वत गोपाल चौधरी ने कहा कि वह इस मामले को दिखवा रहे हैं। हालांकि मेडिकल परीक्षण केबाद शाम को चौकी पहुंची युवती ने कहा कि उसे लगा था कि सूचना 23 को ही पुलिस के पास पहुंच गई होगी।