मैं हूं जिंजर... दुर्बल हूं, नेत्रहीन हूं और बीमार हूं। उम्र 60 वर्ष से ज्यादा हो गई। मेरी काया की खूब नुमाइश हुई। बच्चे और युवा मुझे देख खिलखिलाते तो खूब नजराना लुटाते। कभी मुझे सड़कों पर भीख मांगने का जरिया बनाया तो, कभी बरात में नचाया। उससे मिले नजराने से इंसानों का पेट भरता रहा, मगर मुझे मिला कुपोषण और गठिया जैसा रोग। मेरा क्या कसूर था, मुझे क्यों इस हाल में पहुंचा दिया। - ये पीड़ा है उस हथिनी की, जिसे हाथरस जिले से मथुरा स्थित हाथी अस्पताल में लाया गया है। बेजुबां जानवर है, मगर वाइल्डलाइफ एसओएस के अधिकारी उसके उठने, बैठने और खड़े होने तक के दर्द को महसूस कर रहे हैं, जांच में उसकी बीमारियों का पता चल चुका है।
जिंजर नाम की हथिनी को हाथरस जिले से उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस के संयुक्त अभियान में एक हथिनी को एंबुलेंस से मथुरा के हाथी अस्पताल में लाया गया। पशु चिकित्सकों ने हथिनी का चिकित्सकीय परीक्षण किया तो, उसमें कई बीमारियों के साथ ही बिगड़ती शारीरिक स्थिति का पता चला।