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नेत्रहीन हथिनी की दर्दभरी कहानी: इंसानों ने अपने पेट के लिए इतना चलाया...'जिंजर' पैरों से हुई लाचार

Sun, 19 Dec 2021 10:01 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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हाथी अस्पताल में जिंजर हथिनी - फोटो : Wildlife SOS
मैं हूं जिंजर... दुर्बल हूं, नेत्रहीन हूं और बीमार हूं। उम्र 60 वर्ष से ज्यादा हो गई। मेरी काया की खूब नुमाइश हुई। बच्चे और युवा मुझे देख खिलखिलाते तो खूब नजराना लुटाते। कभी मुझे सड़कों पर भीख मांगने का जरिया बनाया तो, कभी बरात में नचाया। उससे मिले नजराने से इंसानों का पेट भरता रहा, मगर मुझे मिला कुपोषण और गठिया जैसा रोग। मेरा क्या कसूर था, मुझे क्यों इस हाल में पहुंचा दिया। - ये पीड़ा है उस हथिनी की, जिसे हाथरस जिले से मथुरा स्थित हाथी अस्पताल में लाया गया है। बेजुबां जानवर है, मगर वाइल्डलाइफ एसओएस के अधिकारी उसके उठने, बैठने और खड़े होने तक के दर्द को महसूस कर रहे हैं, जांच में उसकी बीमारियों का पता चल चुका है। 

जिंजर नाम की हथिनी को हाथरस जिले से उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस के संयुक्त अभियान में एक हथिनी को एंबुलेंस से मथुरा के हाथी अस्पताल में लाया गया। पशु चिकित्सकों ने हथिनी का चिकित्सकीय परीक्षण किया तो, उसमें कई बीमारियों के साथ ही बिगड़ती शारीरिक स्थिति का पता चला।
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हथिनी का उपचार करते चिकित्सक - फोटो : Wildlife SOS
वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उपनिदेशक डॉ. इलियाराजा ने कहा कि हमें संदेह है कि जिंजर हथिनी का अंधापन उसके मालिकों की लापरवाही और गंभीर कुपोषण के कारण हुआ है। हमने पौष्टिक सब्जियों, फलों और हरे चारे का आहार निर्धारित किया है, जो जिंजर को ताकत वापस हासिल करने में मदद करेगा। उसके शरीर पर पुराने घाव हैं और वह गठिया रोग से भी पीड़ित है। सड़कों पर अधिक चलने के कारण उसके फुटपैड इस हद तक खराब हो गए हैं कि नाजुक फुटपैड अलग होने की कगार पर हैं। 
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जिंजर हथिनी - फोटो : Wildlife SOS
'हालत देखकर हो रहा दुख'
वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ एवं सह संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि नेत्रहीन और वृद्ध हथिनी की नाजुक हालत को देखकर बहुत दुखी हैं, जिंजर को हाथी अस्पताल में भिजवाने के लिए उत्तर प्रदेश वन विभाग के आभारी हैं। 

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हाथी अस्पताल - फोटो : Wildlife SOS
'उसकी देखभाल कराई जाएगी'
वाइल्डलाइफ एसओएस के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट डायरेक्टर बैजूराव एमवी ने बताया कि जिंजर हथिनी की स्थिति काफी गंभीर है, पशु चिकित्सकों ने उसका इलाज शुरू कर दिया है। उचित उपचार मिलेगा और देखभाल कराई जाएगी। 
 
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जिंजर हथिनी को लाय गया हाथी अस्पताल - फोटो : Wildlife SOS
'शादियों में इस्तेमाल की जाती थी हथिनी'
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि बेचारी हथिनी ने किस-किस तरह की स्थिति और दर्द को बर्दाश्त किया है, वह दशकों से सड़कों पर भीख मांगने और शादियों के लिए इस्तेमाल की जाती रही थी।
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