यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में विलुप्त प्राय: पक्षी की श्रेणी में शामिल ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट चिड़िया को चंबल की वादियां भा रही हैं। हर साल इनकी संख्या बढ़ रही है। ये अक्तूबर से यहां आने लगती हैं और गर्मी के शुरू होने तक ये रहती हैं। यह अवधि भी बढ़ रही है। वर्ष 2018 में ये मई तक यहां देखी गईं। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि वन विभाग इस सुंदर चिड़िया के यहां अंडे देने की संभावना को देखते हुए लगातार निगरानी कर रहा है।
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ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट
- फोटो : अमर उजाला
आईयूसीएन (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कान्जर्वेशन ऑफ नेचर) की रेड लिस्ट में शामिल ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट की सीटी जैसी तेज आवाज उसकी पहचान है। बाह, भिंड, मुरैना, इटावा क्षेत्र में यह आवाज पर्यटकों के लिए कौतूहल बनी रहती है।
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ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट
- फोटो : अमर उजाला
छोटे समूह में रहने वाली चिड़िया के नर की पीठ पर काले पंख और मादा की पीठ पर भूरे पंख होते है। चंबल नदी के उथले भाग में हरियाली वाले इलाके में घोंसला बनाती हैं। अप्रैल और मई इनका प्रजनन काल होता है। पैर लंबे गुलाबी-लाल होते हैं। औसत उम्र नौ साल होती है।
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घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
धूप सेंकने बाहर निकले घड़ियालः सर्दी बढ़ते ही चंबल नदी में रहने वाले घड़ियाल और मगरमच्छ भी धूप सेंकने के लिए नदी से बाहर निकलने लगे हैं। इन्हें देखने वालों की भीड़ भी दिनभर चंबल के किनारे पर लगने लगी है।
चंबल नदी में घड़ियाल और उसके बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
ठंड के मौसम में अक्सर सूरज की किरन निकलते ही चंबल किनारे पड़ी बालू गर्म हो जाती है। जिसमे अपने शरीर को गर्मी देने के लिए चंबल नदीं में रहने वाले जलीय जीव बाहर निकल आते हैं। सोमवार को पिनाहट घाट के आसपास चंबल नदी के बाहर निकलकर घड़ियाल और मगरमच्छ बालू में धूप सेंकते दिखाई दिए। साथ ही ये आपस में अठखेलियां भी करते नजर आए। जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ भी घाट किनारे लगी रही।