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तीर्थनगरी में नागा साधुओं ने निकाली स्याही शोभायात्रा, हैरतअंगेज करतब देख दंग रह गए लोग

Wed, 11 Dec 2019 12:19 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
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नागा साधुओं की शोभायात्रा - फोटो : अमर उजाला
कासगंज जिले के सोरों में मंगलवार को नागा साधुओं के हैरतअंगेज करतब देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। देशभर से आए नागा साधुओं ने तुलसी की नगरी में स्याही शोभायात्रा निकाली। हाथों में चिमटा, तलवार, डमरू लिए नागा साधु हैरतअंगेज करतब दिखाते हुए हरिपदी गंगाघाट पहुंचे। यहां सभी ने शाही स्नान किया। स्याही शोभायात्रा देखने के लिए कस्बे में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
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नागा साधुओं की शोभायात्रा - फोटो : अमर उजाला
मार्गशीर्ष मेले में साधुओं का अनूठा संगम मंगलवार को हरिपदी के गंगाघाट पर देखने को मिला। नागालैंड आश्रम से नागा साधुओं की शोभायात्रा शुरू हुई। इसमें शामिल झांकियों में अखाड़ों के प्रमुख महंत विराजमान थे। यह शोभायात्रा योग मार्ग, लहरा रोड, बड़ा बाजार, कछला गेट, रामसिंहपुरा, कटरा बाजार, चंदनचौक, मेला रोड क्षेत्र से होते हुए हरिपदी घाट पहुंची। यहां नागा साधुओं ने शाही स्नान किया।
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शोभायात्रा में नागा साधु - फोटो : अमर उजाला
शोभायात्रा में शामिल नागा साधु अपने शरीर पर भभूत लगाए हुए थे। वहीं अन्य साधु अलग-अलग परिधानों में थे। शोभायात्रा में नगाड़े, घंटे, घडिय़ाल, दुंदुभी बजाई जा रही थी। साधुओं के हाथों में त्रिशूल, तलवार, फरसा आदि नजर आ रहे थे। कई साधु इन शस्त्रों एवं वाद्ययंत्रों से तरह-तरह के प्रदर्शन करते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा में बाल नागा साधु आकर्षण का केंद्र बने। 

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शोभायात्रा में शामिल साधु-संत - फोटो : अमर उजाला
शोभायात्रा श्री शंभू पंच दशनाम आवाहन सरकार गणपति के अखाड़े के नेतृत्व में निकाली गई। यात्रा में पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, सरकार गणपति अखाड़ा बनारस, गणेशगिरी अखाड़ा, जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार, अटल अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, अग्रि अखाड़ा, पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, खडगदर्शन संप्रदाय, वैष्णव चतुर्थ संप्रदाय सहित विभिन्न अखाड़ों के साधु शामिल रहे। 
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नागा साधुओं की शोभायात्रा - फोटो : अमर उजाला
यह है परंपरा
नागालैंड अखाड़े के महंत सीताराम दुबे बताते हैं कि करीब 23 वर्ष पूर्व सोरों के ब्रह्मलीन नागा साधु महंत सेवागिरि ने पूरे भारतवर्ष के नागा साधुओं के अखाड़ों पर जाकर उन्हें एक मंच पर लाकर तीर्थनगरी में हर वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पर स्याही जुलूस एवं शाही स्नान की परंपरा डाली। तभी से यह परंपरा लगातार जारी है। हर वर्ष मार्गशीर्ष पर नागा साधु एकत्रित होते हैं एवं शाही स्नान करते हैं। स्याही यात्रा को पेशवाई भी कहते हैं।
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