जो रस बरस रह्यौ बरसाने वो रस तीन लोक में नाएं...बरसाना की रंगीली गली में द्वापरकालीन लीला बुधवार को फिर सजीव हो उठी। नंदगांव से कृष्ण के सखा होली खेलने के लिए राधारानी के गांव बरसाना पहुंचे। हाथ में लाठियां लिए सजी धजी सखियों ने हंसी ठिठोली की। ब्रज की बोली में वाद संवाद हुआ।
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बरसाना की लठामार होली
- फोटो : Amar Ujala
लाठियों की तड़तड़ाहट के साथ ब्रज का अलौकिक लठामार होली का उत्सव आनंदित करने लगा। लाठियों से बचाव के लिए हुरियारे भी ढाल का सहारा लेने लगे। विश्व प्रसिद्ध लठामार होली में हुरियारिनों की लाठियों से अलौकिक आनंद की बरसात हुई।
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बरसाना की लठामार होली
- फोटो : Amar Ujala
बरसाना में राधारानी की सखियों के चेहरे पर उल्लास था। आज नंदगांव से कान्हा के सखा होली खेलने जो आए हैं। बरसाने के लोग इस दिव्य लीला के लिए सुबह से तैयारियों में जुटे रहे। इससे पहले सुबह श्रीकृष्ण रूपी प्रतीक ध्वज लिए नंदगांव से हुरियारों की टोली प्रिया कुंड पहुंची। स्वागत सत्कार के बाद हुरियारे टोलियों के रूप में बरसाना पहुंचे।
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बरसाना की लठामार होली
- फोटो : Amar Ujala
बरसाने पहुंचने पर रंगीली गली में सजी-धजी खड़ीं हुरियारिनों से वाद संवाद शुरू होता है। प्रेम में सराबोर शब्दों से छींटाकशी होने लगती है। हुरियारिनें भी बस लाठियां बरसाने के इशारे के इंतजार में उतावली हैं। वाद-संवाद कुछ ही क्षणों में प्रेम रस भरी तनातनी में बदलने लगता है। हुरियारिनों की लाठियां बरसने लगती हैं।
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बरसाना की लठामार होली
- फोटो : Amar Ujala
हुरियारे होली के गीतों में मदमस्त होकर नाचते और होली के रसियाओं का गान करते हैं। प्रेम पगी लाठियों की मार से आनंद बरस रहा है। हुरियारे भी अपनी ढालों से लाठियों की मार को बेअसर करते दिखे। बार-बार हुरियारिनें लाठियां बरसा रहीं थीं, तो हुरियारे ठिठोली करते हुए होली के रसिया गाकर मार को झेल रहे थे।
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बरसाना की लठामार होली
- फोटो : Amar Ujala
इस अलौकिक लीला का साक्षी बनने के लिए लाखों श्रद्धालु आतुर दिखे। बरसाने की चारों दिशाओं से होली का आनंद बरस रहा था। रंग, अबीर और गुलाल से सरोबार हो नाचते गाते मस्ती में डूबे श्रद्धालुओं के टोल राधाजी के मंदिर की दिशा में बढ़ रहे थे।
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- फोटो : Amar Ujala
बरसाना की परिक्रमा लगाकर श्रद्धालु राधारानी के दर्शन कर भावविभोर हो गए। मंदिर के आंगन में पहुंचे श्रद्धालु नगाड़ों की थाप पर प्रेमावेश में नृत्य करते हुए झूम रहे थे। आस्था का सैलाब बढ़ता ही जा रहा था। लोग गलियों से होते हुए मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। बरसाने वाले भी राधारानी के भक्तों के स्वागत में रंगों, अबीर गुलाल की बरसात कर रहे थे।
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बरसाना की लठामार होली
- फोटो : Amar Ujala
भक्तों का समुद्र मंदिर की ओर बढ़ रहा था। सभी अपनी आराध्य राधारानी की इस दिव्य होली के बरस रहे आनंद को लूटने की होड़ लिए बढ़ते ही जा रहे थे। मीलों की दूरी तय करने के बाद जब लोग मंदिर परिसर में पहुंचे तो राधारानी के गगनभेदी जयकारे लगाकर अपनी उपस्थिति को दर्ज कराया। राधारानी मंदिर में तिल भर स्थान नहीं था।
राधारानी मंदिर के सेवायत पिचकारियों से टेसू के रंगों से भरे प्रसाद को नाचते गाते आए भक्तों पर बरसात कर रहे थे। भक्त भी अपनी आराध्य राधारानी के इस दिव्य प्रसाद को शरीर पर ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य मान रहे थे। भक्तों ने राधारानी के श्री चरणों में शीश झुकाकर प्रसाद ग्रहण करने के बाद नाचते गाते आगे बढ़ लिए।