जो रस बरसो बरसाने में सो रस तीन लोक में नायें। वाकई अद्भुत है बरसाना की लठामार होली। भाव-भक्ति की लाठियों से आनंद का रस बरसा उससे हर कोई सराबोर रहा। रंगीली गली में लठामार होली के शुरू होते ही जयकारे गूंज उठे। बरसाने की हुरियारिन नंदगांव के हुरियारों पर लठ बरसा रही थीं। हुरियारे ढाल से बचाव कर रहे थे। ऐसा रंग और गुलाल उड़ा कि हर तरफ राधे राधे की गूंज हो रही थी।
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लाठियों लेकर खड़ीं हुरियारिनें
- फोटो : अमर उजाला
राधारानी की नगरी बरसाना में शुक्रवार की सुबह से ही होली का रंग बिखरने लगा। चारों दिशाओं से होली की मस्ती और आनंद के रंग अबीर गुलाल से सराबोर होते हुए श्रद्धालु राधाजी के मंदिर की तरफ बढ़ रहे थे। पहले बरसाना की परिक्रमा लगाई और फिर श्रीजी मंदिर में जाकर दर्शन किए। मंदिर के आंगन में भक्त श्रद्धा भाव से नृत्य करते हुए झूम रहे थे।
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मंदिर के सेवायत रंग और प्रसाद की बारिश
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर के सेवायत रंग और प्रसाद की बारिश कर रहे थे। श्रद्धालु लाडली जी के आगे झोली फैलाकर अपनी मनोकामना को पूर्ण करने का आशीर्वाद मांग रहे थे। मंदिर परिसर में कहीं भी कदम रखने को जगह नहीं थी। आस्था का सैलाब इस कदर उमड़ रहा था कि गलियों में भी लोग होली के रंग में तरबतर होकर राधे..राधे का जय घोष कर रहे थे।
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बरसाना की गलियों में धूमधाम से खेली गई लठामार होली
- फोटो : अमर उजाला
बरसाना में नंदगांव से आने वाले हुरियारों का बेसब्री से इंतजार हो रहा था। आकाश से हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा की जा रही थी। इसी बीच हुरियारों के झुंड पहुंचने लगे। श्रीजी का आशीर्वाद लिया। फाग के आनंद के बीच शुरू होता है राग और प्रेमपगी गालियों का सिलसिला। राधारानी के गुणगान के बीच कान्हा की महिमागान के जवाबी गान का लंबा सिलसिला।
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हुरियारिनों से हंसी ठिठोली करते हुरियारे
- फोटो : अमर उजाला
हुरियारे रंगीली गली की ओर बढ़ चले हैं। हुरियारों का गली में खड़ीं राधारानी की सखियों से हंसी ठिठौली का दौर शुरू हो गया है। छतों पर से महिलाएं, बच्चे रंग बरसा रहे हैं। हुरियारे रंग की बारिश में भीग रहे हैं। तभी रंगीन पानी की धार के साथ शुरू हो जाते हैं लाठियों के वार। पूरी गली में लठामार होली का उत्सव शुरू हो जाता है। नंदलाल के जयकारे लगाते हुरियारे प्रेमपगी लाठियों के बीच हुरियारिनों से ठिठोली करते जा रहे हैं।
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बरसाना में हुरियारों पर प्रेमपगी लाठियां बरसातीं हुरियारिनें
- फोटो : अमर उजाला
ब्रज में मान्यता है कि हुरियारिन जिस के सिर पर लाठी का स्पर्श करा दें वो अत्यंत सौभाग्यशाली माना जाता है। श्रद्धालु हुरियारिन से आग्रह पूर्वक अपने सिर पर लाठी का स्पर्श कराते हैं। कृतज्ञ हो क्षमतानुसार नेग में रुपये अथवा उपहार देते हैं। चरण स्पर्श कर नेग के रूप में भी रुपये अथवा उपहार दे आशीर्वाद लेने की भी प्रथा पूरे होली स्थल पर स्थान-स्थान पर देखने को मिल रही थी। स्थानीय हंसी-ठिठोली का रिश्ता रखने वाले भी इसमें पीछे नहीं रहते वह प्रेम और श्रद्धा तो पूरी दिखाते हैं पर नेग देने से पहले घूंघट उठवा मुंह दिखाई करने से भी नहीं चूकते।
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लठामार होली से पूर्व नगाड़ा बजाते हुए श्रद्घालु
- फोटो : अमर उजाला
गोस्वामी समाज के मुखिया रामभरोसी गोस्वामी ने पुष्प माला से नंदगांव से आए गोस्वामी समाज के मुखिया का स्वागत किया। मंदिर के जग मोहन में दोनों गांवों के लोग समाज गायन के लिए वाद्य यंत्रों के साथ आमने सामने बैठ गए। आपस में हंसी ठिठौली के बीच राधा कृष्ण की लीलाओं का पदों के माध्यम से गायन किया।
बरसाना के श्रीजी मंदिर में उड़ता रंग गुलाल
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समाज गायन के दौरान गोस्वामी जनों द्वारा एक दूसरे पर गुलाब के फूलों के पंखुडियों को बरसा कर फूल होली शुरू की जो बाद में अबीर गुलाल से होती हुई टेसू के फूलों से बने रंग तक जा पहुंची। इस अवसर पर छैल बिहारी गोस्वामी, रास बिहारी गोस्वामी, रमेश गोस्वामी, उमाशंकर गोस्वामी, मदन मोहन रसिया, निर्भय गोस्वामी, राकेश श्रोत्रिय, योगेश गोस्वामी, ताराचंद गोस्वामी, बांकेविहारी गोस्वामी, यतींद्र तिवारी, बच्चू कान्हा आदि ने पद गायन किया।