मथुरा के फालैन गांव में होली पर एक बार फिर भक्त प्रहलाद की लीला जीवंत हो उठी। यहां 50 वर्षीय बाबूलाल पंडा जब धधकती होली से गुजरे तो वहां मौजूद लोग यह दृश्य देखकर दंग रह गए। आग की लपटों का पंडा के शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। देश-विदेश से आए हजारों लोग इस अद्भुत लीला के साक्षी बने। होलिका दहन के बाद पूरा फालैन गांव होली के रंगों सराबोर हो गया।
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फालैन गांव में जलती हुई होली
- फोटो : अमर उजाला
ब्रज की अद्भुत और अलौकिक होली पूरे विश्व में जानी जाती है। होली के पर्व पर यहां सदियों पुरानी लीलाएं जीवंत हो जाती हैं। इनमें भक्त प्रहलाद की लीला भी शामिल हैं, जिसे मथुरा के गांव फालैन में आज भी एक पंडा परिवार जीवंत किए हुए है। कोसीकलां से करीब सात किलोमीटर दूर बसे फालैन गांव में गुरुवार तड़के एक बार फिर इस परंपरा का निर्वहन किया गया।
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फालैन गांव में अनूठी होली देखने को जुटे लोग
- फोटो : अमर उजाला
होली की अनूठी परंपरा को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों लोग फालैन गांव पहुंचे। गुरुवार तड़के जैसे ही होलिका दहन हुआ, वैसे ही भक्त प्रहलाद के जयकारे लगे। होली स्थल पर ऊंची ऊंची आग की लपटें उठने लगीं। सभी लोग अब दिल थामकर उन पलों का इंतजार कर रहे थे, जब होली की आग से पंडा गुजरता है।
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धधकती होली की आग से गुजरता पंडा
- फोटो : अमर उजाला
धधकती होली की लपटों के बीच जब बाबूलाल पंडा दिखाई दिए तो वहां सन्नाटा पसर गया। ऐसा लग रहा था कि माना कुछ पलों के लिए वहां मौजूद लोगों की सांसें थम गईं हो। जैसे ही बाबूलाल पंडा अंगारों पर चलते हुए सुरक्षित बाहर निकले, पूरा गांव भगवान श्रीकृष्ण और प्रहलाद के जयकारों से गूंज उठा। लोग इसे चमत्कार मान रहे थे।
फालैन गांव में अनूठी होली देखने को जुटे लोग
- फोटो : अमर उजाला
फालैन गांव स्थित प्रहलाद मंदिर में पूजा अर्चना और कुंड में आचमन करने के बाद होली की इस परंपरा का निर्वहन किया गया। इसके बाद गांव में होली की धूम शुरू हो गई। प्रहलाद के मेले के नाम से प्रसिद्ध फालैन गांव की होली में आसपास बड़ा नगाड़ा बजाते हुए चौपाल मंडलियां निकली। रात भर होली के रसिया गांव में गूंजते रहे।