आगरा के बटेश्वर में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की बचपन की पाठशाला भी गुरुवार को गमजदा रही। सुबह की प्रार्थना में उनकी सेहत की सलामती की दुआ की गई। शाम को उनके निधन की खबर से पाठशाला से जुड़ा हर शख्स गमजदा था। पंडित नेहरू ने अटल के भाषण पर उनके बडे़ नेता बनने के बयान की बुनियाद इसी पाठशाला में ही पड़ गई थी।
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तस्वीरें: बटेश्वर में गमजदा अटल के बचपन की पाठशाला, सूनी गांव की गलियां
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बटेश्वर निवासी श्रीकृष्ण बिहारी वाजपेयी के शिंदे की छावनी ग्वालियर स्थित घर में 25 दिसबर 1924 को जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी का बचपन बटेश्वर में बीता। 1927 में बटेश्वर के जमुना प्रसाद चतुर्वेदी ने जिस पाठशाला का निर्माण कराया था। अटल जी वहीं पर पढे़। अब यह प्राइमरी स्कूल बन गया है। परंतु पाठशाला की सीढियां और प्रार्थना सभास्थल आज भी मौजूद है।
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फाइल फोटो
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इसी स्कूल में पढे़ और प्रधानाध्यापक बने पुत्तूलाल ने अटल जी से जुड़ी यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि अटल बचपन से साथियों का नेतृत्व करते थे। स्कूल में उनका भाषण जोरदार होता था। समवेत स्वर में काव्यपाठ कर करते थे। उनके पारिवारिक भतीजे राकेश वाजपेयी ने बताया कि छुट्टी के बाद यमुना किनारे बरगद के पेड़ के नीचे खाना खाते और खेलते कूदते थे।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
अटल जी का बचपन बटेश्वर की जिन गलियों में बीता था, गुरुवार की शाम उनके निधन की खबर के साथ शोक में डूब गई। एम्स में उनकी हालत नाजुक होने पर बाह बटेश्वर में सलामती के लिए दुआओं का दौर शुरु हुआ था। निधन के साथ गम में डूबे लोग उनकी आत्म शान्ति की प्रार्थना और श्रद्धांजलि में जुट गए।
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अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्तेदार
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एम्स में अटल जी की हालत नाजुक होने पर बटेश्वर में उनकी पाठशाला और बिजौली में संत ब्रज किशोर दास कन्या इंटर कॉलेज में उनकी सलामती के लिए दुआ की गई। बटेश्वर में उनकी भांजी बहू गंगा देवी सुबह से सलामती के लिए रामायण का पाठ कर रही थी। शाम को उनके निधन की खबर के साथ निशब्द हो गई।
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अटल जी के लिए पूजा करते लोग
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उनके पारिवारिक भतीजे रमेश बाजपेयी और उनकी पत्नी राजेश्वरी ने तुलसी पर जल चढ़ाया। उनकी दुआ भी काम नहीं आई। पारिवारिक दामाद मंगलाचरण शुक्ला अटल के परिवार की कुल देवी मां विन्धवासिनी के मंदिर में दिन भर पूजा करते रहे। बटेश्वर में साधु संतों ने ब्रह्मलाल जी मंदिर में भी पूजा पाठ किया।
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खेत में लगा शिलापट्ट
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6 अप्रैल 1999 में अटल बिहारी बाजपेयी ने बटेश्वर के खांद पर आगरा-इटावा वाया बटेश्वर रेल लाइन का शिलान्यास किया था। शिलान्यास का पत्थर भी अवनीश के खेत में लगा था। जिसे अब नाथूराम यादव ने खरीद लिया है। हाल के सालों में कुछ लोग पत्थर को उखाड़ने के लिए पहुंचे थे, जिन्हे किसानों ने खदेड़ दिया था। पत्थर किसानों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। किसान चाहते है कि पत्थर की जगह पर अटल बिहारी वाजपेयी विराजमान हों। मन्दिर बने तो उन्हें कोई बुराई नहीं है।