भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी का आज जन्मदिन है। निधन के बाद उनके पैतृक गांव बटेश्वर के चौमुखी विकास और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के खूब दावे किए गए। अस्थि कलश विसर्जन से पहले उनके प्रशासनिक अधिकारियों का अमला कई दिन तक यहां डेरा डाले रहा। योजनाओं का खाका खींचा। मगर, साढ़े तीन महीने बाद उनके जन्मदिन पर सरकार कोई सौगात नहीं दे पाई है।
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कागजों में दबे रहे सरकार के ‘अटल’ दावे, आज भी बदहाल है वाजपेयी का बटेश्वर
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अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक गांव बटेश्वर स्थित घर
दावों से पहले बटेश्वर जैसा था, आज भी वैसा ही है। जमींदोज हो चुका पैतृक आवास, खंडहर हो चुकी जंगलात कोठी, टूटी सड़कें, जर्जर हो चुके मंदिर। ऐसे में बटेश्वर सरकार से सिर्फ यही पूछ रहा है कि अस्थि कलश के साथ दावों, वादों और घोषणाओं का भी यमुना में विसर्जन कर दिया क्या।
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बटेश्वर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
सितंबर में अस्थि विसर्जन से पहले बटेश्वर के सर्वांगीण विकास के लिए लगभग 25 करोड़ की योजनाएं बनाई गई थीं। गांव को ऐतिहासिक, धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही अटल की यादें सहेजने के लिए भी योजनाएं तैयार कीं। उनके जीवन चरित्र, कविताएं, स्मृतियां और स्थलों को सहेजने की तैयारी थी। तब उम्मीद थी कि अस्थि विसर्जन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इनकी घोषणा कर सकते हैं। मगर, ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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अटलजी
- फोटो : डेमो
बटेश्वर की जिन गलियों में खेलकूद कर बड़े हुए पूर्व प्रधानमंत्री, जिस स्कूल में पढ़े, जिस जंगलात कोठी को फूंककर क्रांति की धारा से जुडे़, जिस यज्ञ स्थल पर उन्होंने आहुतियां दीं, जिन घाटों पर यमुना स्नान किया, जिस पर्यटन कांपलेक्स का उद्घाटन किया, जिस रेल लाइन की आधारशिला रखी, ये सब बदहाल हैं।
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
बटेश्वर के लिए प्रस्ताव
- जर्जर हो चुके मंदिरों के जीर्णोद्धार कर संरक्षण।
- प्रसिद्ध पशु मेले को राज्य स्तर का दर्जा देने की तैयारी।
- पशु हाट का प्रचार प्रसार पर देना था जोर।
- मुख्य मार्ग को बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने किया था सर्वे।
- पूरे क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और पार्क विकसित करने की थी योजना।
- रात्रि निवास को विश्रामालय और हट बनाने का था विचार।
- मंदिरों के बीच में यज्ञ स्थल विकसित भी होना था।
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इसी मंदिर में पूजा करते थे अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : अमर उजाला
अटलजी की यादें संजोने के वादे
- पैतृक आवास सहित उनसे जुड़े सभी भवन संजोएंगे।
- आवास वाली जमीन पर बनेगा पूर्व प्रधानमंत्री का स्मारक।
- उनके नाम पर इंटर कालेज विकसित करने की घोषणा हुई थी।
- जंगलात कोठी को उसके मूल स्वरूप में सहेजा जाएगा।
- कोठी का इतिहास और क्रांतिकारियों की कहानी प्रदर्शित होगी।
- प्रदर्शन में आडियो-विजुअल शो भी कराए जाने पर हुआ मंथन।
- रेलवे हॉल्ट को अटल के नाम पर स्टेशन बनाने की थी योजना।
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यमुना में अटलजी की अस्थियां विसर्जित करते मुख्यमंत्री
अटलजी के पैतृक निवास को सहेजना तो दूर अस्थि विसर्जन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने से पहले जो सफाई व्यवस्था की गई थी, वह फिर से बदहाल है। यहां फिर से बबूल उग आए हैं। अटल जी के साथ पाठशाला में पढे़ पुत्तूलाल कहते है कि स्कूल के हालात भी नहीं बदले है। जो वादे किये है उन पर भरोसा नहीं होता। अटल जी का सानिध्य पाने वाले राम सिंह आजाद, चरन सिंह यादव ने बताया कि विकास के नाम पर अटलजी विरासत बदहाल पड़ी है। योगी के अस्थि विसर्जन के दौरान अटल जी के खंडहर तक न आने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की।
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जंगलात कोठी
- फोटो : अमर उजाला
सितंबर में जिस जंगलात कोठी को चमका दिया गया था, उस पर फिर से कब्जा होने लगा है। 1942 में महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन से प्रभावित होकर अटल ने क्रांतिकारियों संग जंगलात कोठी पर धावा बोला था। यहां तिरंगा फहराया और खुद को आजाद घोषित किया था। यहां अब उपले थापे जाने लगे हैं।
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बटेश्वर मेले में घोड़े।
- फोटो : अमर उजाला
सपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दो बार पशु मेले में आए थे। यहां उन्होंने हॉर्स शो देखा था। तब उन्होंने पशु मेले को भव्य रूप देने का एलान किया था। इसे राष्ट्रीय स्तर का बनाने का वादा किया गया था। इसके उलट पिछले दो सालों में मेला सिर्फ हाट बनकर सिमट गया है। पशुओं की संख्या लगातार घट रही है।
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
तत्कालीन मंडलायुक्त अमृत अभिजात ने बटेश्वर दौरे के दौरान बटेश्वर में हरिद्वार की तर्ज पर यमुना की महाआरती की घोषणा की थी। कुछ समय तक तो ठीक-ठाक चला। बाकायदा प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में आरती कार्यक्रम होते रहे। देशी और विदेशी पर्यटक भी बुलाए गए थे। लेकिन जल्द ही इस पर विराम लग गया।