आगरा में 24 अगस्त को बटेश्वर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि विसर्जन को लेकर भाजपाई असमंजस में है। अभी तक पार्टी स्तर से अस्थि विसर्जन का कोई कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है। हालांकि, बटेश्वर में प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं। पैतृक गांव की तस्वीर बदलने लगी है।
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बदलने लगी अटलजी के बटेश्वर की तस्वीर, अस्थि विसर्जन की तारीख पर असमंजस
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बटेश्वर घाट का निरीक्षण करते पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
अटलजी की अस्थियां कई नदियों में विसर्जित की जा रही हैं। उनकी अस्थियां आगरा भी आनी हैं। भाजपा की ओर से पहले बल्केश्वर घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री की अस्थियां विसर्जित करने की योजना थी। इसके लिए यहां तैयारियां शुरू कर दी गईं। महापौर नवीन जैन और महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे के नेतृत्व में घाटों का निरीक्षण कर यहां तैयारियों के संबंध में कवायद शुरू की गई।
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बटेश्वर पहुंचे विधायक और अफसर
अटलजी की अस्थियां कई नदियों में विसर्जित की जा रही हैं। उनकी अस्थियां आगरा भी आनी हैं। भाजपा की ओर से पहले बल्केश्वर घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री की अस्थियां विसर्जित करने की योजना थी। इसके लिए यहां तैयारियां शुरू कर दी गईं। महापौर नवीन जैन और महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे के नेतृत्व में घाटों का निरीक्षण कर यहां तैयारियों के संबंध में कवायद शुरू की गई।
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खंडहर हो चुके पैतृक निवास स्थल की तस्वीर अब बदली नजर आ रही है। यहां साफ-सफाई करते हुए बबूल की झाड़ियां हटा दी गईं। रातोंरात इस जगह की तस्वीर बदल दी गई। जमीन को समतल किया जा रहा है। पैतृक निवास स्थल के सामने ही अटलजी के परिवार के कुलदेवी का मंदिर है। उसके चारों ओर भी साफ सफाई की जा रही है।
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ऐतिहासिक जंगलात कोठी
- फोटो : अमर उजाला
1942 में क्रांतिकारियों ने जिस कोठी पर धावा बोल कर उसे नष्ट किया था, इसे भी कब्जा मुक्त कराया गया। 15 साल पहले इस कोठी पर रामनिवास के परिवार ने कब्जा कर लिया था। इसे अतिक्रमण से मुक्त किया गया। राम निवास पत्नी कृष्णा देवी, पुत्रियों राधिका, विशाखा व पुत्र करन के साथ खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। कृष्णा देवी ने बताया कि उसका कच्चा घर बारिश में ढह गया था। तब से इसी कोठी में रह रहे थे।
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
बटेश्वर की शिव मंदिर श्रृंखला के रानीघाट पर अटलजी की अस्थियां विसर्जित करने करने की तैयारी है। इसके लिए बुधवार को दिनभर घाट पर तैयारियां चलीं। यहां सुरक्षा का खाका भी तैयार किया गया है। हालांकि अब तक पार्टी स्तर से अस्थि विसर्जन का कोई कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है और न ही प्रशासन के पास मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या किसी अन्य मंत्री के आने की कोई अधिकारिक सूचना है।