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कागजों में दबे रहे सरकार के ‘अटल’ दावे: 1942 में जंगलात कोठी फूंक फहराया था तिरंगा, आज पाथे जा रहे कंडे

Sun, 15 Aug 2021 10:01 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक गांव बटेश्वर - फोटो : अमर उजाला
देश को आजाद हुए 74 साल हो गए, बटेश्वर में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से जुडे़ क्रांति स्थल का संरक्षण नहीं हो सका है। खंडहर में तब्दील हो रही जंगलात कोठी में कंडे पाथे जा रहे हैं, पशु बांधे जा रहे है। उनके घर के आंगन तक को बबूल की झाड़ियों ने घेर लिया है। 1942 में बटेश्वर में रक्षा बंधन के दिन चौक में आल्हा की महफिल सजी थी। महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन से प्रभावित होकर लीलाधर वाजपेयी ने ऐसा क्रांतिकारी भाषण दिया कि करीब 300 देशभक्तों ने बटेश्वर के जंगल में बनी कोठी पर धावा बोल दिया। आजादी के दीवानों ने कोठी को तहस नहस कर  राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर खुद को आजाद घोषित कर दिया।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
कोठी पर तैनात फॉरेस्ट इंचार्ज रहमत अली ने बाह थाने में शरण ली। तब तक क्रांतिकारियों ने मवेशी खाने में बंद निरीह लोगों को आजाद कर दिया। बिजकौली गांव में जंगलात के दफ्तर में आग लगा दी। इसके बाद गोरों की पल्टन ने बटेश्वर गांव घेर लिया।
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अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक घर के अवशेष - फोटो : अमर उजाला
किले पर तोपे लगा दी। पूरे गांव से 10 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया। लीलाधर वाजपेयी, भवानी प्रसाद दुबे, शोभाराम चंद्रवंशी, अटल बिहारी वाजपेयी, मुन्ना लाल, माता दीन, वंशीधर, गजराज जोगी, रुक्मिनी  चेतराम, रघुवर दयाल, प्रेम बिहारी वाजपेयी समेत 37 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ।

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अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
अफसोस है कि अब तक बटेश्वर की जंगलात कोठी उपेक्षित पड़ी है। अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी यादों को सहेजने के सरकार के दावे खोखले साबित हो गए।
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जंगलात कोठी - फोटो : अमर उजाला
बटेश्वर के राकेश वाजपेयी, चरन सिंह यादव, डॉ. शिव सिंह वर्मा, राम सिंह आजाद, पुत्तू लाल आदि ने जंगलात कोठी को क्रांति स्थल के रूप में विकसित किए जाने और उनसे जुडे़ स्थलों को संरक्षित किये जाने की मांग की है।         
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