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निर्भया केस: महिलाओं में आक्रोश, कहा- जो दरिंदों को बचाए, वो कानून बदल दो

Wed, 05 Feb 2020 12:50 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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संवाद कार्यक्रम में महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
जिन दरिंदों को सुप्रीम कोर्ट सजा-ए-मौत दे चुका है। राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर चुके हैं। उन्हें फांसी देने में देरी क्यों ? कानून तो पीड़ितों का कवच होता है, अगर यह मुजरिमों को बचा रहा है, तो इसे बदल देना चाहिए। इंसाफ में देरी से ही हैदराबाद एनकाउंटर को लोग सही ठहरा रहे हैं...। अपराजिता अभियान के तहत आगरा स्थित अमर उजाला कार्यालय में मंगलवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने निर्भया के दरिंदों को फांसी में हो रही देरी पर इन शब्दों में अपना रोष जाहिर किया। 

महिलाओं ने कहा कि 16 दिसंबर, 2012 को निर्भया के साथ हुई हैवानियत को सात साल हो चुके हैं। फांसी में देरी से बहुत गलत संदेश जा रहा है। केंद्र सरकार ऐसा कानून बनाए जिससे दरिंदों को सजा मिलने में देरी न हो।
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वत्सला प्रभाकर और शीतल अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
'फांसी का टलना शर्मनाक'
इससे शर्मनाक और कुछ नहीं हो सकता है कि दरिंदे कानून का सहारा लेकर फांसी को टाल रहे हैं। समझ नहीं आता कि ऐसे दरिंदों के केस वकील लड़ते क्यों हैं? अगर दरिंदगी के एक महीने में ही फांसी हो गई होती तो कई निर्भया की जान बच जाती।- वत्सला प्रभाकर, अध्यक्ष महिला शांति सेना 

'कानून से भरोसा कम हो रहा'
दरिंदों की फांसी को टालने के लिए जो लोग उनकी मदद कर रहे हैं, कानूनी दांवपेंच आजमा रहे हैं, वे जयचंद हैं, इन्हें निर्भया की मां की फरियाद भी सुनाई नहीं दे रही है, इस देरी से लोगों का कानून पर भरोसा कम हो रहा है, दरिंदों का दुस्साहस बढ़ रहा है, अब और देरी न हो। - शीतल अग्रवाल, समाजसेवी 
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रजनी गुप्ता और माया सिंह - फोटो : अमर उजाला
'10 साल में एक भी फांसी नहीं'
सिर्फ निर्भया का मामला नहीं है, दस साल में दुष्कर्म के एक भी मामलों में फांसी नहीं हुई। इंसाफ का तकाजा तो यह है कि सजा ऑन द स्पॉट दी जाए ताकि दरिंदों में भय पैदा हो। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हमें बच्चों को संस्कार देने होंगे, बेटों महिलाओं का आदर करना सिखाएं - रजनी गुप्ता, सदस्य, भारत विकास परिषद ‘एकलव्य’

'ऐसे कैसे मिलेगा इंसाफ'
सुप्रीम कोर्ट से बड़ा भला कौन है, उसने फांसी की सजा दे दी तो इस पर अमल होना चाहिए। दरिंदे कानून का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, यह सबको पता है, पर सब चुप बैठे हैं, ऐसे निर्भयाओं को इंसाफ कैसे मिलेगा ? - माया सिंह, महिला संयोजिका, भारत विकास परिषद ‘एकलव्य’

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रेखा मल्होत्रा और सोफिया अली - फोटो : अमर उजाला
'सब्र का इम्तिहान ले रहे हैं'
अगर सुप्रीम कोर्ट से न्याय नहीं मिलेगा तो लोग कहां जाएंगे? पहले एक दरिंदे ने याचिका की, फिर दूसरे ने, एक -एक कर इसलिए दी जा रही है ताकि फांसी टलती जाए, ये लोग देशवासियों के सब्र का इम्तिहान ले रहे हैं - रेखा मल्होत्रा, समाजसेवी 

'नहीं मिल रहा मजलूमों को इंसाफ'
ये दाग दाग उजाला, ये शब गजीदा-सहर । वो इंतिजार था जिसका, ये वो शहर तो नहीं॥   आजादी के वक्त जो सपने देखे थे, उनमें यह भी था कि हर मजलूम को इंसाफ मिलेगा लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। निर्भया के बाद और भी दरिंदगी के मामले हुए, लड़कियों को जिंदा जला तक दिया गया, फिर यह देरी क्यों ? दरिंदे फांसी पर चढ़ेंगे, तो दरिंदगी पर लगाम लगेगी - साफिया अली, शिक्षिका, सगीर फातिमा गर्ल्स इंटर कॉलेज।
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उर्मिला माहेश्वरी और डॉ. रेनू वर्मा - फोटो : अमर उजाला
'फांसी की सजा मिली है तो लटकाया जाए'
दरिंदे कानून के दांवपेचों का सहारा ले रहे हैं, जरूरत है कि सरकार इस कानून को बदल दे, जिस केस में राष्ट्रपति दया याचिका खारिज दें, उसमें फिर कोई अपील न हो, सजा फांसी की मिली है तो उसे लटकाया जाए, अब तो दरिंदे बचे हुए हैं, फांसी लटक गई है - डॉ. रेनू वर्मा, प्राचार्य, बीडी जैन गर्ल्स कॉलेज

'दुष्कर्म के मामले की फास्ट ट्रैक में हो सुनवाई'
दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई होनी चाहिए, ज्यादा से ज्यादा एक महीने में सजा हो जानी चाहिए, इंसाफ में देरी नाइंसाफी है, इस केस में लंबा समय हो चुका है, अब और देरी होगी तो कानून से भरोसा उठेगा - उर्मिला माहेश्वरी, सदस्य, माहेश्वरी महिला मंडल
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सुमन सुराना, कविता अग्रवाल, शीला बहल - फोटो : अमर उजाला
कानून को बदलने की जरूरत
जो दरिंदों को सजा से बचाए, वह कानून लचर ही नहीं, लाचार भी कहा जाएगा। जरूरत है कि कानून बदला जाए, दरिंदों को सजा मिले। अगर कानून सजा नहीं दिला पाएगा तो पुलिस की तरीका, जो हैदराबाद में अपनाया गया, सही कहा जाएगा - सुमन सुराना, हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन

पूरे देश की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर
10. पूरे देश की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर हैं, आखिर क्यों दरिंदो को समय पर समय दिया जा रहा है। इंतजार उनकी फांसी का है जबकि मिल रही है तारीख पर तारीख। इससे गलत संदेश जा रहा है, सरकार को भी इस पर सोचना चाहिए - कविता अग्रवाल, सदस्य, गिर्राज सेवा मंडल

दरिंदे उड़ा रहे कानून का माखौल
11. कानून में संशोधन करना होगा, सरकार को सोचना होगा कि एक तरफ पीड़ित दर दर भटक रहे हैं इंसाफ के लिए और दूसरी और दरिंदे कानून का माखौल उड़ा रहे हैं - शीला बहल, महिला शांति सेना

 

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