जज्बे और हौसले के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में मुकाम बना चुके युवाओं ने अमर उजाला के यूथ कॉन्क्लेव में आगरा को बेहतर बनाने के लिए मंथन किया। शनिवार को अमर उजाला परिसर में हुए कॉन्क्लेव में हर क्षेत्र से जुड़े युवाओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, सुविधाओं और प्रशिक्षण के लिए अपनी मदद की पेशकश की। तय किया कि जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करके एकसाथ सभी मिलकर स्मार्ट आगरा के लिए पहल करेंगे। चिकित्सा, शिक्षा, उद्योग, संस्कृति, समाज, महिला उत्थान और व्यापार से जुड़े इन युवाओं ने स्मार्ट आगरा के लिए अपना विजन भी पेश किया।
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डॉ केशव मल्होत्रा और उद्यमी अमित जैन
- फोटो : अमर उजाला
बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जाएं
इंजीनियरिंग कंपोनेंट उद्यमी अमित जैन ने कहा कि औद्योगिक रूप से पिछड़ रहे आगरा में कारोबार करने की जगह युवा दूसरे शहरों को चुन रहे हैं। बुनियादी सुविधाएं, एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी, स्पेशल जोन के जरिए प्रतिभाशाली युवाओं को आगरा में रोका जा सकता है, जिसका फायदा रोजगार के रूप में सभी को मिलेगा।
पहले लोगों को स्मार्ट बनाएं
आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ केशव मल्होत्रा ने कहा कि पर्यावरण में हो रहे बदलाव पर ध्यान देने की जरूरत है, जिससे स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ीं कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण, दिनचर्या के जरिए स्वस्थ रहा जा सकता है। लोगों को जागरूक करके स्मार्ट बनाएं, तभी शहर में बदलाव नजर आएगा।
'जूडा' गांवों में सेवा के लिए तैयार
जूडा अध्यक्ष डॉ भूपेंद्र चाहर ने कहा कि एसएन मेडिकल कॉलेज में इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। युवा चिकित्सक काम करना चाहते हैं, लेकिन मशीनें नहीं हैं। आगरा को एम्स चाहिए ताकि हर बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली न भागना पड़े। जूनियर डाक्टर किसी भी गांव, कस्बे में कैंप के जरिए अपनी सेवाएं देने को तैयार हैं।
सुविधाओं से स्मार्ट बने शहर
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ शशि भूषण उपाध्याय ने कहा कि शहर दिखने से स्मार्ट नहीं, बल्कि सुविधाओं से स्मार्ट होता है। मेडिकल कॉलेज में मल्टीस्पेशिएलिटी सेंटर, इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। सरकार का बजट स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज्यादा खर्च हो। एक बीमारी पर होने वाला खर्च कई परिवारों की दो पीढ़ियों को प्रभावित कर रहा है।
युवा रक्तदान के लिए आगे आएं
मेडिकल कॉलेज की चिकित्सक डॉ नीतू चौहान ने कहा कि रक्तदान के प्रति युवा जागरूक हों और जब भी रक्तदान करें तो सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज में करें। यहां उनका रक्त गरीबों की मदद के काम आता है। बिना एक्सचेंज के यह उपलब्ध है। हम सौ फीसदी रक्त बिना एक्सचेंज के देना चाहते हैं, जिनमें युवाओं का सहयोग चाहिए।
संस्कृति से युवाओं का जुड़ाव बढ़ा
रंगकर्मी एवं शिक्षक राहुल अचलेश गुप्ता ने कहा कि हमारी संस्कृति, कला, साहित्य के साथ युवाओं का जुड़ाव बढ़ रहा है, बस उन्हें प्रोत्साहन की जरूरत है। हम सामाजिक बुराइयों को दूर करने में नाटक के जरिए लोगों को जागरूक करने और बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं। बदलाव आ भी रहा है।
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फैशन डिजाइनर गरिमा सारस्वत पांडेय और अधिवक्ता अर्चना शर्मा
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युवाओं के लिहाज से हो शहर स्मार्ट
फैशन डिजाइनर गरिमा सारस्वत पांडेय ने कहा कि आगरा के युवा यहां काम करने की जगह बाहर दूसरे शहरों में काम करना चाहते हैं। फैशन हो या अन्य क्षेत्र, यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुविधाएं ऐसी नहीं कि भविष्य सुरक्षित मान सकें। शहर को इसी लिहाज से स्मार्ट बनाया जाए ताकि युवा यहां रुकें और अपने लिए चुने रोजगार में आगे बढ़ें।
सामाजिक गतिविधियों से जोडे़ं
अधिवक्ता अर्चना शर्मा ने कहा कि सामाजिक गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने की जरूरत है। उन्हें हर काम की जल्द सुनवाई चाहिए, जिसके लिए सिस्टम बनाने की जरूरत है। उनको समाज के सरोकारों के प्रति जिम्मेदार बनाने के लिए काम किया जाए।
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सामाजिक कार्यकर्ता तुषा शर्मा और शीतल अग्रवाल
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सफाई के प्रति जागरूक करें
सामाजिक कार्यकर्ता शीतल अग्रवाल ने कहा कि युवतियों को हाईजीन के प्रति जागरूक करने की जरूरत है, वह पुरानी मान्यताओं पर ही चल रही हैं, हाथ में स्मार्टफोन है, लेकिन स्मार्ट नहीं हैं। उनके लिए स्कूल, कॉलेजों में जागरूक करने के साथ मीडिया अहम भूमिका निभा सकता है।
युवा संगठन बदलाव की पहल करें
सामाजिक कार्यकर्ता तुषा शर्मा ने कहा कि हमारे आसपास स्वच्छता, सुरक्षा का माहौल रहे, इसमें युवाओं की अहम भूमिका हो सकती है। युवा संगठन मीडिया के साथ मिलकर ऐसी पहल कर सकते हैं, जो हमारे शहर के लोगों को नागरिक सुविधाओं और उनके इस्तेमाल के लिए स्मार्ट बनाए।
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शिक्षक रोहित गुप्ता, शूटर ऐश्वर्या शर्मा
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सुरक्षित माहौल बनाने की जरूरत
शूटर ऐश्वर्या शर्मा ने कहा कि स्टेडियम हो या शहर की गलियां, हमें हर जगह सुरक्षित माहौल चाहिए। स्ट्रीट लाइटें ही जहां नहीं, वहां प्रेक्टिस के बाद घर लौटने में डर रहेगा। बुनियादी सुविधाओं के बिना मेरा आगरा स्मार्ट कैसे होगा। खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं होंगी, तभी प्रतिद्वंद्वी से मुकाबला कर पाएंगे।
सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाएं
शिक्षक रोहित गुप्ता ने कहा कि शहर को स्मार्ट बनाना है तो सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं जुटाकर उन्हें बेहतर बनाना होगा। इनमें गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं जो अच्छी शिक्षा पाकर विकास में भागीदार होंगे। मिड डे मील की खराब गुणवत्ता होगी तो बच्चे स्वस्थ्य, पोषित कैसे होंगे।
विश्वविद्यालय के स्टूडेंट दीप कुमार गर्ग और प्रिया सिंह
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छुट्टियों में हों जागरूकता कार्यक्रम
विश्वविद्यालय की छात्रा प्रिया सिंह ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में छुट्टियों की जगह उन दिनों में जागरूक करने वाले कार्यक्रम होने चाहिए, जिससे हम समाज की बुराइयों, चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार हो सकें, उनके बारे में समझ सकें।
स्वच्छता अभियान में निरंतरता हो
विश्वविद्यालय के छात्र दीप कुमार गर्ग ने कहा कि शहर में स्वच्छता का अभियान चलता है लेकिन निरंतरता का अभाव है। सरकारी विभाग जो भी अभियान चलाएं, पहले उन्हें मुकाम तक पहुंचाएं। व्यावहारिक शिक्षा के जरिए युवाओं को जवाबदेह और जिम्मेदार बनाया जाए।