प्रदूषण के कारण छाई धुंध ने गर्भवती महिलाओं के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दमा और सांस रोग से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में गर्भपात और समय पूर्व प्रसव का खतरा बढ़ गया है। आगरा में सोमवार को ऐसी हालत पर 11 गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। वहीं स्मॉग से मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
लेडी लायल (महिला अस्पताल) में ओपीडी में 706 गर्भवती महिलाएं आईं। इसमें से 189 महिलाओं को सांस और अस्थमा की परेशानी मिली। इनमें से ऑक्सीजन की कमी होने से 11 गर्भवती महिलाओं को प्रसव के तय समय से पहले ब्लीडिंग की शिकायत मिली। इनको भर्ती कर अल्ट्रासाउंड कराया गया।
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आगरा में छाई धुंध
- फोटो : अमर उजाला
सीएमएस डॉ. कल्याणी मिश्रा ने बताया कि धुंध से गर्भवती महिलाओं, जो सांस-दमा से पीड़ित हैं, उनके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम पहुंच रही है। इससे गर्भपात, तय समय से पहले प्रसव के खतरे के साथ गर्भस्थ शिशु का विकास प्रभावित हो रहा है। उनमें मानसिक विकार होने का 40 फीसदी खतरा बढ़ गया है।
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एसएन की ओपीडी में मरीजों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की ओपीडी में 211 मरीज पहुंचे, इसमें से 45 महिलाओं को सांस लेेने में तकलीफ मिली। इनमें से 18 की हालत खराब होने पर वक्ष रोग भेज दिया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह ने बताया कि धुंध का असर से गर्भवती महिलाओं पर असर दिख रहा है। ऑक्सीजन की कमी सइनकी सांस उखड़ने के साथ गर्भस्थ शिशु को भी नुकसान पहुंच सकता है। उनको बाहर कम निकलने, मास्क लगाने और प्राणायाम करने की सीख दे रहे हैं।
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अस्पताल में मरीजों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग में अस्थमा अटैक के चार मरीज समेत पांच को भर्ती करना पड़ा। इनको सांस लेने में तकलीफ होने पर जांच की तो नलिकाओं में संक्रमण मिला, इनमें सूजन थी। विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि जांच में इनमें से दो को आक्सीजन भी दी गई है। सूजन कम करने के लिए भाप दी जा रही है।
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फाइल फोटो
प्रदूषण ने मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालना शुरू कर दिया है। लोगों में बेचैनी, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ रहा है। मानसिक रोग विशेषज्ञों के पास सप्ताह भर से ऐसे मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ गई है, जिनमें स्मॉग के कारण व्यवहार में बदलाव आ रहा है। अस्थमा के मरीजों में यह बेचैनी और तनाव ज्यादा बढ़ रहा है।
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प्रदूषण से बचने के लिए मास्क लगाए युवक
- फोटो : अमर उजाला
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ दिनेश राठौर ने बताया कि धुंध के कारण मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। उदासी, चिड़चिड़ापन, बेचैनी वाले लक्षण बढ़ रहे हैं। धुंध के कारण रोशनी कम हो रही है जो मस्तिष्क की सक्रियता, जैविक चक्र को प्रभावित कर रही है।
यह बरतें सावधानी
- घर की खिड़की-दरवाजे बंद रखें, छिड़काव करें।
- सुबह-शाम ज्यादा स्मॉग है, इस समय टहलने से बचें।
- बाहर जाते वक्त मुंह मास्क लगाएं, चश्मा भी पहनें।
- आंखों में जलन होने पर रगडे़ं नहीं, हाथों से आंखें न दबाएं।
- गर्म कपड़े निकाल रहे हैं तो उनको पहले धूप लगा लें।
- सांस-दमा रोगी दवाएं बंद न करें, परेशानी पर डॉक्टर को दिखाएं।