डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (पूर्ववर्ती आगरा विश्वविद्यालय) की स्थापना 01 जुलाई वर्ष 1927 को रेवरेंड कैनन एडब्लू डेविस, मुंशी नारायण प्रसाद अस्थाना, डॉ. एलपी माथुर, लाला दीवानचंद, रायबहादुर आनंद स्वरूप जैसे प्रबुद्ध नागरिकों के प्रयासों से हुई थी। विश्वविद्यालय का मूल अधिकार क्षेत्र आगरा संयुक्त प्रांत, मध्य भारत और राजपूताना थे। इस विश्वविद्यालय से करीब दर्जन भर विश्वविद्यालय निकले हैं। होम्योपैथी व आयुर्वेदिक कॉलेजों को छोड़ दिया जाए तो अब विश्वविद्यालय आगरा मंडल के चार जिलों में सिमट कर रह गया है। इससे 649 कॉलेज संबद्ध हैं।
विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. सुगम आनंद ने बताया कि कोलकाता और प्रयागराज जैसे विश्वविद्यालयों को बड़े क्षेत्र में फैलाव की वजह से परीक्षा कराने में कठिनाई हो रही थी। इस पर एक जुलाई 1927 को आगरा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। 14 संबद्ध कॉलेजों और 34 छात्रों के साथ प्रारंभ हुए इस विश्वविद्यालय में महज चार संकाय थे, कला, विज्ञान, वाणिज्य और कानून। वर्ष 1936 में चिकित्सा, 1938 में कृषि, 1968 में गृह विज्ञान संकाय खुले। वर्तमान में चार आवासीय परिसरों में फैले इस विश्वविद्यालय में 15 संस्थान हैं और 649 महाविद्यालय हैं। होम्योपैथी और आयुर्वेद के प्रदेश भर के कॉलेज से संबद्ध है। अलीगढ़ मंडल के 408 कॉलेज वर्तमान सत्र से राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय, अलीगढ़ से संबद्ध हो गए हैं।
विज्ञापन
2 of 7
कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ (केएमआई)
- फोटो : अमर उजाला
विश्वविद्यालय के आवासीय संस्थानों में वर्ष 1953 में कन्हैया लाल माणिकलाल मुंशी हिंदी और भाषा विज्ञान विद्यापीठ, वर्ष 1957 में समाज विज्ञान संस्थान और वर्ष 1968 में गृह विज्ञान संस्थान और वर्ष 1984 में बेसिक साइंस इंस्टीट्यूट और पुस्तकालय और सूचना विज्ञान विभाग स्थापित हुए। इतिहास एवं संस्कृति विभाग वर्ष 1985 में, सेठ पदम चंद जैन वाणिज्य और प्रबंधन संस्थान वर्ष 1993 में, दाऊ दयाल वोकेशनल इंस्टीट्यूट वर्ष 1994 में तथा इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान वर्ष 1998 में शुरू हुए। स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज वर्ष 1998 में, ललित कला संस्थान वर्ष 2000 में और पर्यटन प्रबंधन संस्थान वर्ष 2004 में खुले। विश्वविद्यालय में 48 कुलपति रहे हैं।
विज्ञापन
3 of 7
आगरा विश्वविद्यालय के छात्र रह चुकी हैं ये हस्तियां
- फोटो : अमर उजाला
विश्वविद्यालय के पुरातन छात्रों में इन हस्तियों का नाम शुमार
विश्वविद्यालय के पुरातन छात्रों में पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा और वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई, फाइबर ऑप्टिक्स के जनक वैज्ञानिक नरेंद्र सिंह कपानी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के अलावा लंबी फेहरिस्त है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी वेबसाइट पर इनके अलावा पूर्व कुलपति डॉ. जीसी सक्सेना, वर्तमान में महाराजा सूरजमल ब्रज विश्वविद्यालय, भरतपुर के कुलपति प्रो. राजेश धाकरे, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी पूनम यादव की तस्वीर भी लगाई है।
4 of 7
डॉ भीमराव विश्वविद्यालय आगरा का भवन
- फोटो : अमर उजाला
छात्रों को समय से डिग्री व अंकतालिकाएं देनी होगी
मैने 60 के दशक में इस विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। किसी भी काम के लिए छात्र को विश्वविद्यालय नहीं जाना पड़ता था। वर्ष 2001 से 2004 तक कुलपति रहा, स्थितियां ठीक रहीं। अब छात्र-छात्राओं को डिग्री और अंकतालिका के लिए परेशान होना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय की छवि सुधारने के लिए समय से छात्रों को डिग्री व अंकतालिकाएं देनी होंगी। - डॉ. जीएस सक्सेना, विवि के पूर्व कुलपति व पुरातन छात्र
विज्ञापन
5 of 7
डॉ.भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा
- फोटो : अमर उजाला
यहां से निकले विश्वविद्यालय बेहतर स्थिति में
इस विश्वविद्यालय से करीब एक दर्जन विश्वविद्यालय निकले हैं। सभी की स्थिति डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से बेहतर है। इस विश्वविद्यालय में अच्छी छवि के व योग्य कुलपति की तैनाती होनी चाहिए। कर्मचारियों के अंतर्विश्वविद्यालयीय स्थानांतरण होने चाहिए। विश्वविद्यालय में काम को लटकाने की प्रवृत्ति बन गई है, उसमें सुधारना होगा। - प्रो. केएस राणा, पुरातन छात्र व मेवाड़ विवि के कुलपति
विज्ञापन
6 of 7
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
छात्र केंद्रित व्यवस्थाएं बनानी होंगी
विश्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास रहा है, इससे कई एतिहासिक कॉलेज संबद्ध हैं। आज तेजी से हो रहे परिवर्तन के बीच विश्वविद्यालय को छात्र केंद्रित व्यवस्थाएं बनानी होगी, जिससे छात्रों की समस्याएं सुलझ सकें और वह पूरे मनोयोग से अध्ययन करें। विश्वविद्यालय को कॉलेजों के शिक्षकों को सशक्त बनाने में भूमिका निभानी होगी। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य परिषद के महामंत्री व सेंट जोंस कॉलेज के प्राचार्य
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा
- फोटो : अमर उजाला
सुधार के प्रयास किए जा रहे
विश्वविद्यालय की व्यवस्था में लगातार सुधार किए जा रहे हैं। मेडिकल की परीक्षाओं की पेंडेंसी पहले से कम हो गई है। तकनीक का इस्तेमाल कर चीजों को और बेहतर किया जाएगा। - प्रो. अजय तनेजा, प्रति कुलपति, विवि