आगरा में बुधवार को 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचा तूफान पहली बार आगरा के लोगों ने महसूस किया। तूफान की रफ्तार इससे पहले कभी भी इतनी नहीं रही। 24 साल पहले 1994 में 108 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक तूफानी हवाएं चली थीं। बुधवार को हुई बारिश ने भी 34 साल पुराना रिकार्ड तोड़ दिया।
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तबाही
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार शाम को जिसने भी तूफान को झेला, उसी ने कहा कि जिंदगी में ऐसा तूफान कभी नहीं देखा। ऐसा नुकसान और मौसम का रौद्र रूप कभी नजर नहीं आया। ऐसा हुआ भी है। मौसम विभाग के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। आगरा में इससे पहले तूफानी हवाओं की रफ्तार अप्रैल 1994 में रही थी जब 108 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।
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24 साल बाद बुधवार शाम को यह रिकार्ड टूट गया। इसके साथ ही अप्रैल महीने में एक दिन में सबसे ज्यादा बारिश का रिकार्ड भी टूट गया। 23 अप्रैल 1984 को आगरा में 47.6 मिमी बारिश रिकार्ड की गई थी। बुधवार को महज तीन घंटे में ही 80 मिमी बारिश दर्ज की गई जो इस दिन पूरे देश में सबसे ज्यादा रिकार्ड की गई।
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कन्याकुमारी एवं पूर्वोत्तर के जिलों में आगरा से कम बारिश रही। अब तक आगरा में अप्रैल के महीने में 94.6 मिमी बारिश हो चुकी है। पहली बार बेहद तेज रफ्तार में आए तूफान ने ताजमहल को काफी नुकसान पहुंचाया। यही वजह रही कि दिल्ली से एएसआई निदेशक जाह्नवीज शर्मा को आगरा भेजा गया।
वह सुबह ताजमहल पहुंचे और नुकसान की फोटोग्राफी कर रिपोर्ट तैयार की। शाम को वह वापस दिल्ली चले गए, जहां एएसआई महानिदेशक ऊषा शर्मा को रिपोर्ट देंगे। यह पहला मौका है जब किसी प्राकृतिक आपदा में दिल्ली से रिपोर्ट लेने कोई अधिकारी आया हो। ताज में भूकंप का मामूली असर पड़ा था। रॉयल गेट के कुछ इनले पीस ही निकले थे।