132 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से बुधवार रात आए तूफान के बाद ताजनगरी में हर तरफ तबाही का भयावह मंजर है। गुरुवार को मृतकों की संख्या 49 पर पहुंच गई। 100 से ज्यादा घायल हैं। 500 से ज्यादा मकान धराशायी हो गए। बिजली के 5000 से ज्यादा खंभे गिरे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
मृतकों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका है। घायलों में 15 की हालत नाजुक बताई गई है। उधर, शासन ने मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। खेरागढ़ में तो इतनी तबाही हुई है कि दर्द में डूबे लोग तूफान को प्रलय बता रहे हैं। प्रशासन ने जिले में मृतक संख्या 46 बताई है। खेरागढ़ तहसील क्षेत्र में 24 लोग मरे हैं।
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अांधी से तबाही
- फोटो : अमर उजाला
फतेहाबाद में 12, बाह में चार, एत्मादपुर में 2, किरावली में तीन और सदर में एक की जान गई है। इसके अतिरिक्त खेरागढ़ के दो लोग धौलपुर में मरे हैं। सदर के कबूलपुर में एक बच्चा करंट लगने से मरा है। वह प्रशासन की सूची में नहीं है। तूफान की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि 100 साल पुराने पीपल के पेड़ जड़ सहित उखड़ गए।
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ग्वालियर रोड पर बाइकों से लदे दो बड़े कंटेनर पलट गए। बिजली के खंभे और तार ही नहीं, टूटे खेरागढ़ में पूरा बिजलीघर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। 11 अप्रैल को 130 किमी. प्रति घंटा से आए तूफान के बाद देहात में अभी तक बिजली व्यवस्था ठीक नहीं हो पाई है। गुरुवार को आए तूफान से तो यह पूरी तरह ध्वस्त हो गई। डीवीवीएनएल के अधिकारियों कहना है कि व्यवस्था सुचारु होने में एक महीना तक लग सकता है।
जो घायल सात दिन तक अस्पताल में भर्ती रहेगा, उन्हें 4300 रुपये और जो इससे अधिक समय तक भर्ती रहेगा, उन्हें 12700 रुपये मुआवजा दिया जाएगा। पशु हानि में गाय, भैंस का 30 हजार, दुधारू छोटे पशुओं का तीन हजार, गैर दुधारू बड़े पशुओं का 25 हजार रुपये प्रति पशु मुआवजे की व्यवस्था की गई है।