दरिंदगी के खिलाफ ताजनगरी एकजुट हो रही है। उन्नाव और कठुआ और एटा जैसी वारदात पर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। सामाजिक संगठन ही नहीं, स्कूली बच्चे तक गुस्से में नजर आ रहे हैं। रोजाना कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं। कई और संस्थाएं तैयारी कर रही हैं।
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प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
जगह-जगह स्कूल की छात्राओं ने बच्चियों से हो रही दरिंदगी के खिलाफ आवाज बुलंद की। उनके हाथ में तलवार और हॉकी थी। शायद वो संदेश दे रहीं थीं कि अब बर्दाश्त इंतिहा हो चुकी है।
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इस गुस्से की वजह यह भी है कि घटनाएं रुक नहीं रही हैं। कभी उन्नाव, कभी कठुआ, तो कभी एटा। आगरा में भी ऐसी दरिंदगी हो चुकी है जिसे सुनकर भी कलेजा कांप उठता है।
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छात्राओं के विरोध-प्रदर्शन में मोमबत्ती नहीं जलाई। बल्कि हाथों में हॉकी है, तलवार उठाई है। कहीं न कहीं वो यह भी सबक देना चा रही हैं कि दरिंदों को सबक सिखाने के लिए नारी शक्ति तैयार है।
वहीं एक साल पहले पुलिस के एंटी रोमियो स्कवैड ने जितनी तेजी दिखाई थी, अब उतनी ही गहरी निंद्रा में है।स्कूल-कॉलेजों के पास छेड़छाड़ हो रही है। स्कवैड का पता नहीं। तीन दिन पहले मनचले पकड़ने के लिए एसपी सिटी कुंवर अनुपम सिंह को दौड़ लगानी पड़ी।