ताजमहल के पास 9 वार्डों को स्मार्ट बनाने की योजनाओं पर एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आगरा स्मार्ट सिटी कंपनी ने ताजमहल के पास ऐसा स्मार्ट काम किया कि हजारों लोग इलाज से ही महरूम हो गए।
स्मार्ट सिटी की रैंकिंग में आगरा को देश और प्रदेश के स्तर पर पुरस्कृत किया गया। यह गौरव का क्षण है। 19 योजनाओं पर 1000 करोड़ रुपये खर्च करने के साथ ही स्मार्ट सिटी के 10 प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जो लगभग पूरे हो चुके हैं। ...लेकिन अभी काफी कुछ किया जाना है। बड़ी समस्या योजना के तहत अब तक हुए विकास कार्यों का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाना है। स्मार्ट हेल्थ सेंटर तैयार है लेकिन उद्घाटन के लिए छह महीने से इंतजार हो रहा है। हेरिटेज वॉक भी शुरू नहीं किया गया है। स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम ने कोरोना काल में बेहतर काम किया लेकिन इसके तहत मुख्य बाजारों और चौराहों पर लगाए गए पैनिक बटन काम ही नहीं कर रहे हैं। फतेहाबाद रोड सौंदर्यीकरण और सड़क निर्माण हुआ तो दिसंबर में ही मेट्रो का काम शुरू हो गया और रोड के हालात पहले से भी ज्यादा खराब हो गए। अभी सीवर, नाला, पानी की योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। स्मार्ट सिटी की सभी योजनाओं पर अमर उजाला टीम ने पड़ताल की।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
ताजमहल के पास 9 वार्डों को स्मार्ट बनाने की योजनाओं पर एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आगरा स्मार्ट सिटी कंपनी ने ताजमहल के पास ऐसा स्मार्ट काम किया कि हजारों लोग इलाज से ही महरूम हो गए। ताजमहल के 500 मीटर दायरे के अंदर बने नगर निगम अस्पताल को तोड़कर नई इमारत बनाने की योजना बनाई और राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण से अनुमति मिलने से पहले ही इसे तोड़ दिया। अब नगर निगम के अस्पताल में इलाज बंद है और लोगों को सांई की तकिया स्थित जिला अस्पताल तक आना पड़ता है। तीन साल पहले तोड़े गए अस्पताल के पुननिर्माण के लिए न तो अनुमति ही मिल पाई है और न ही इसकी जगह कोई अस्थायी अस्पताल का निर्माण किया जा सका है, जबकि स्मार्ट सिटी शहर में 10 स्मार्ट हेल्थ सेंटर का निर्माण कर रही है।
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आगरा का कोविड कमांड सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
10 में से केवल एक हेल्थ सेंटर का ही संचालन
स्मार्ट सिटी कंपनी नगर निगम एमजी रोड के गेट पर ही एक हेल्थ सेंटर चला रही है, जबकि इसके लिए 10 हेल्थ सेंटर प्रस्तावित थे। जनवरी में दो अन्य केंद्रों का उद्घाटन होना था जो अब तक नहीं हो पाया। दो साल में केवल एक हेल्थ सेंटर ही शुरू हो सका। यहां भी अब चिकित्सक नहीं बैठते। केवल चश्मों की बिक्री और दवाएं ही मिल रही है। कोरोना काल में मास्क या सैनिटाइजर तक इस हेल्थ सेंटर से उपलब्ध नहीं कराए गए। गधापाड़ा और आवास विकास कालोनी के हेल्थ सेंटर बनकर तैयार हैं, पर उद्घाटन के इंतजार में काम नहीं आ रहे।
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जिला अस्पताल, आगरा
- फोटो : अमर उजाला
जच्चा-बच्चा अस्पताल भी तोड़ा, अनुमति नहीं मिली
आगरा स्मार्ट सिटी के एक और प्रोजेक्ट में भी नगर निगम अस्पताल की तरह गड़बड़ी की गई। पश्चिमी गेट स्थित मलको गली के पास जच्चा-बच्चा केंद्र, ताजगंज को एनओसी नहीं मिल पाई। 3.87 करोड़ से इसका निर्माण होना था, पर यह जगह भी ताजमहल के 500 मीटर दायरे में है। इसके पास ही बारह खंभा स्मारक है जो महज 3.25 मीटर दूर है। आगरा स्मार्ट सिटी प्रशासन ने अनुमति मिलने से पहले ही जर्जर बिल्डिंग को तोड़ दिया। एएसआई की आपत्ति के बाद काम रुक गया। नियम के मुताबिक संरक्षित स्मारक के 100 मीटर दायरे में निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। नियम जानने से पहले ही स्मार्ट अधिकारियों ने इमारत गिराने की लापरवाही दूसरी बार की।
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महताब बाग से ताजमहल का नजारा
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नियमों के उल्लंघन में फंसी स्मार्ट सिटी कंपनी
आगरा स्मार्ट सिटी कंपनी के महाप्रबंधक नगर निगम के मुख्य अभियंता रहे और सुप्रीम कोर्ट तथा एनजीटी की बंदिशों से वाकिफ हैं, लेकिन स्मार्ट सिटी कंपनी उनकी अनदेखी से कई मामलों में नियमों के उल्लंघन में फँस गई। हाल में ही वन विभाग ने स्मार्ट सिटी कंपनी पर 215 पेड़ काटने के मामले में एफआईआर दर्ज कराई है। इससे पहले ताजमहल के 500 मीटर दायरे में पश्चिमी गेट पर हेरिटेज वॉक और दक्षिणी गेट पर अस्पताल के निर्माण के लिए अनुमति न लिए जाने पर एएसआई ने एफआईआर कराई थी।
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जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह
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घटिया गुणवत्ता पर केवल नोटिस दिए
डीएम प्रभु एन सिंह ने स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों से जांच कराई तो उसमें घटिया गुणवत्ता के साथ अप्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा निर्माण की शिकायतें पाई गई। इस मामले में केवल देव कंस्ट्रक्शन से 7 दिन में जवाब मांगा गया है। इससे पहले भी स्मार्ट सिटी के घटिया निर्माण कार्य की पोल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की टीम खोल चुकी है। उसने अपनी जांच रिपोर्ट में नाले, फुटपाथ, डक्ट, आरसीसी के काम में खामियां पाकर रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन उस रिपोर्ट को भी स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने दरकिनार कर दिया।
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आगरा: सड़क का हाल
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जिम्मेदारों की दलील
काम लेट होने पर ठेकेदार पर जुर्माना
स्मार्ट सिटी के जो काम लेट हो रहे हैं, उन पर हर दिन ठेकेदार पर जुर्माना लगा रहे हैं। गुणवत्ता के लिए ठेकेदार और कंपनी के कर्मचारियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। उनके जवाब मिलने पर कार्रवाई होगी। जो अधूरे काम हैं, उन्हें अगस्त तक पूरा कराने का प्रयास होगा।
-निखिल टी फुंडे, सीईओ, स्मार्ट सिटी कंपनी
कामों की गुणवत्ता पर सख्ती की जरूरत
स्मार्ट सिटी के कई काम मानसून से पहले पूरे हो सकते थे, जो नहीं किए गए। गुणवत्ता और मॉनीटरिंग को लेकर सख्ती की जरूरत है। जो योजनाएं अधूरी हैं, वह पूरी हों ताकि लोगों को फायदा मिले।
-दिगंबर सिंह धाकरे, सदस्य, स्मार्ट सिटी सलाहकार समिति
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आगरा: आवास विकास में सड़क खोदाई का काम जारी
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कई अच्छे काम, लोगों को फायदा मिलेगा
स्मार्ट सिटी के काम में खामियों को हम लगातार सही करा रहे हैं। काम की गति धीमी है। कई महीनों से बैठक ही नहीं हुई। फिर भी कुछ अच्छे काम हुए है, जिनका लोगों को फायदा मिलेगा।
-राजेश खुराना, सदस्य, स्मार्ट सिटी सलाहकार समिति
केवल नाम स्मार्ट, लोग परेशान हो रहे
केवल नाम स्मार्ट है, काम सभी सरकारी ढंग से हो रहे हैं। मेट्रो को देखकर भी यह नहीं सुधर रहे। लोग परेशान हों, ऐसा कोई काम स्मार्ट सिटी का कैसे हो सकता है। जरा एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) क्षेत्र आकर देखिए। -अभिनव जैन, पर्यटन उद्यमी, फतेहाबाद रोड
आगरा: आठ महीने बाद नहीं बन सकी सड़क
- फोटो : अमर उजाला
घटिया कामों की शिकायत कर चुके हैं
हम लोग स्मार्ट सिटी के तहत किए गए घटिया कार्यों की शिकायत कर चुके हैं। डीएम ने जब निरीक्षण कर जांच कराई तो वही बातें सामने आईं जो हम लोग उठा रहे थे। सख्ती से कार्रवाई हो, तभी काम होंगे और गुणवत्ता ठीक होगी - रवि बिहारी माथुर, पार्षद