आगरा के श्री पारस अस्पताल में वेंटिलेटर और हाईफ्लो पर भर्ती मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम किया गया था। उनकी ऑक्सीजन कम करके देखी गई। पांच मिनट में ही मरीज नीले पड़ गए और छटपटाने लगे। पीड़ितों का आरोप है कि इस मॉकड्रिल के बाद 22 गंभीर मरीजों में से 16 की जान चली गई। अप्रैल के अंतिम सप्ताह के दौरान दूसरी लहर चरम पर थी। शहर में ऑक्सीजन से लेकर खाली बेड, रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए हाहाकार मच रहा था। तब श्री पारस अस्पताल में 96 मरीज भर्ती थे। जिनमें 60 ऑक्सीजन पर निर्भर थे। आठ वेंटिलेटर पर, 10 बाईपैप मशीनों व 10 मरीज हाईफ्लो पर थे। फेफड़ों में गंभीर संक्रमण था। इधर, 25 की रात ऑक्सीजन खत्म होने की अफवाह से हड़कंप मचा। दूसरे दिन सुबह सात बजे कथित मॉकड्रिल की गई। जिसके बाद 48 घंटे के डेथ ऑडिट में 16 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। वहीं इस संबंध में श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिन्जय जैन का कहना है कि गंभीर मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम करके देखा गया था, पूरी तरह ऑक्सीजन बंद नहीं की गई। उन्होंने कहा, ऑक्सीजन की कमी होने पर सीमित आपूर्ति मरीजों के लिए दी गई थी।