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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: 'कम किया गया था वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों का ऑक्सीजन लेवल'

Fri, 09 Jul 2021 12:19 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
आगरा के श्री पारस अस्पताल में वेंटिलेटर और हाईफ्लो पर भर्ती मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम किया गया था। उनकी ऑक्सीजन कम करके देखी गई। पांच मिनट में ही मरीज नीले पड़ गए और छटपटाने लगे। पीड़ितों का आरोप है कि इस मॉकड्रिल के बाद 22 गंभीर मरीजों में से 16 की जान चली गई। अप्रैल के अंतिम सप्ताह के दौरान दूसरी लहर चरम पर थी। शहर में ऑक्सीजन से लेकर खाली बेड, रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए हाहाकार मच रहा था। तब श्री पारस अस्पताल में 96 मरीज भर्ती थे। जिनमें 60 ऑक्सीजन पर निर्भर थे। आठ वेंटिलेटर पर, 10 बाईपैप मशीनों व 10 मरीज हाईफ्लो पर थे। फेफड़ों में गंभीर संक्रमण था। इधर, 25 की रात ऑक्सीजन खत्म होने की अफवाह से हड़कंप मचा। दूसरे दिन सुबह सात बजे कथित मॉकड्रिल की गई। जिसके बाद 48 घंटे के डेथ ऑडिट में 16 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। वहीं इस संबंध में श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिन्जय जैन का कहना है कि गंभीर मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम करके देखा गया था, पूरी तरह ऑक्सीजन बंद नहीं की गई। उन्होंने कहा, ऑक्सीजन की कमी होने पर सीमित आपूर्ति मरीजों के लिए दी गई थी। 
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राजू सिंह, प्रियंका सिंह - फोटो : अमर उजाला
छंटनी का मतलब मरने वाले हैं मरीज
वीडियो में सबकुछ साफ हो गया है। अब संचालक चाहे कुछ भी कहे, झूठ बोल रहा है। मॉकड्रिल का मतलब था कि ऑक्सीजन बंद कर देखा गई। कितनी ऑक्सीजन बच सकती है। छंटनी का मतलब गंभीर मरीज अलग हो गए। जिनकी बाद में मौत हो गई। मेरी मां की मृत्यु भी ऑक्सीजन नहीं मिलने से हुई। - प्रियंका सिंह, दहतोरा
 
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श्री पारस अस्पताल में जांच के लिए आए अधिकारी फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कैसे कम कर सकते हैं ऑक्सीजन
गंभीर मरीज की ऑक्सीजन कैसे कम कर सकते हैं। उनके ऑक्सीजन लेवल से छंटनी के नाम पर छेड़छाड़ की गई। ऑक्सीजन लेवल कम करने से उनकी मौत हो गई। मौतों की सूचना परिजनों को देर से दी गई। क्योंकि एक साथ बताते तो तीमारदार हंगामा करते। जानबूझ कर सच छुपाया है। - नत्थीलाल त्यागी, मधु नगर

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पारस अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
ऑक्सीजन कम करना भी आपित्तजनक
ऑक्सीजन लेवल से ही मरीजों का एसपीओटू निर्भर करता है। अगर किसी मरीज की ऑक्सीजन कम कर देंगे तो उसका एसपीओटू स्वत: कम हो जाएगा। उसको सांस लेने में तकलीफ होगी। ऐसे स्थिति में जोखिम बढ़ने से मरीज की जान जा सकती है। अगर कोई हॉस्पिटल ऐसा करता है तो ये आपत्तिजनक है। ऐसा करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी जरूरी है। जैसा कि सुबह सात बजे का मॉकड्रिल का समय है उस दौरान कोई विशेषज्ञ मौजूद नहीं होगा। - डॉ. देवेंद्र गुप्ता, चिकित्सा मामलों के विधि विशेषज्ञ
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श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
पूरी बंद नहीं की ऑक्सीजन
गंभीर मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम करके देखा गया था, पूरी तरह ऑक्सीजन बंद नहीं की गई। ऑक्सीजन की कमी होने के कारण मरीजों को सीमित आपूर्ति दी गई थी। गंभीर मरीजों की आपूर्ति में कमी नहीं की गई। - डॉ. अरिन्जय जैन, संचालक, श्री पारस अस्पताल

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