आगरा के श्री पारस अस्पताल में दमघोंटू मॉकड्रिल मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस विवेचना कर रही है। यह पता किया जा रहा है कि वीडियो किसने और कब बनाया ? इसमें एडिटिंग तो नहीं की गई ? वीडियो कब वायरल किया गया ? मगर, सबसे अहम पीड़ितों के बयान अब तक नहीं लिए गए। वहीं अस्पताल के सभी कर्मचारियों से भी पूछताछ नहीं की गई है, जबकि ये लोग मॉकड्रिल का सच सामने ला सकते हैं।
छत्ता की कृष्णा कॉलोनी निवासी अशोक चावला ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके पिता की 26 अप्रैल और भाई की पत्नी की 27 अप्रैल को मौत हुई थी। मॉकड्रिल के बयान का तथाकथित वीडियो सामने आने के बाद उन्होंने पुलिस को तहरीर दी। मुकदमा दर्ज करने की मांग की। प्रशासन ने जांच में अस्पताल संचालक को क्लीन चिट दे दी।
मगर, पुलिस की तहरीर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके बयान तक दर्ज नहीं लिए गए हैं। अगर, बयान दर्ज किए जाएं तो वह दोनों दिन के हालात का सच पुलिस के सामने रख सकते हैं। उनके बयान को नजरअंदाज किया जा रहा है। थाना प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र बालियान का कहना है कि आठ कर्मचारियों से पूछताछ की गई है। वहीं तीन प्रार्थनापत्र डाक से थाने पर आए थे, जिन्हें जांच के लिए प्रशासन की टीम के पास भेजा गया था।