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यह कैसी जांच: श्री पारस अस्पताल मामले में पुलिस ने न स्टाफ से पूछताछ की, न पीड़ितों के लिए बयान

Sat, 26 Jun 2021 12:19 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
आगरा के श्री पारस अस्पताल में दमघोंटू मॉकड्रिल मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस विवेचना कर रही है। यह पता किया जा रहा है कि वीडियो किसने और कब बनाया ? इसमें एडिटिंग तो नहीं की गई ? वीडियो कब वायरल किया गया ? मगर, सबसे अहम पीड़ितों के बयान अब तक नहीं लिए गए। वहीं अस्पताल के सभी कर्मचारियों से भी पूछताछ नहीं की गई है, जबकि ये लोग मॉकड्रिल का सच सामने ला सकते हैं। 

छत्ता की कृष्णा कॉलोनी निवासी अशोक चावला ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके पिता की 26 अप्रैल और भाई की पत्नी की 27 अप्रैल को मौत हुई थी। मॉकड्रिल के बयान का तथाकथित वीडियो सामने आने के बाद उन्होंने पुलिस को तहरीर दी। मुकदमा दर्ज करने की मांग की। प्रशासन ने जांच में अस्पताल संचालक को क्लीन चिट दे दी। 

मगर, पुलिस की तहरीर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके बयान तक दर्ज नहीं लिए गए हैं। अगर, बयान दर्ज किए जाएं तो वह दोनों दिन के हालात का सच पुलिस के सामने रख सकते हैं। उनके बयान को नजरअंदाज किया जा रहा है। थाना प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र बालियान का कहना है कि आठ कर्मचारियों से पूछताछ की गई है। वहीं तीन प्रार्थनापत्र डाक से थाने पर आए थे, जिन्हें जांच के लिए प्रशासन की टीम के पास भेजा गया था।
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श्री पारस अस्पताल प्रकरण : मुख्य दरवाजे पर तैनात पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
‘पत्नी ने अपनी बहन को बताया, बार-बार बंद कर रहे थे ऑक्सीजन’
न्यू राजामंडी निवासी सौरभ अग्रवाल 13 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हो गए थे। उन्हें सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं पत्नी राधिका भी संक्रमित थीं। उनको श्री पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 27 अप्रैल को पत्नी की मौत हो गई। अब मॉकड्रिल का तथाकथित वीडियो सामने आने पर सौरभ ने थाना न्यू आगरा में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। इसमें पत्नी के अस्पताल में भर्ती के दौरान अपनी बहन को भेजे गए व्हाट्सएप चैट की कापी भी थी। एक चैट में लिखा था कि ऑक्सीजन बार-बार बंद की जा रही है। सब के साथ यही हो रहा है। यह मैसेज 26 अप्रैल का बताया गया। ऐसी कई चैट सौरभ के पास हैं। पुलिस ने अब तक सौरभ की ओर से दी गई चैट को जांच में शामिल नहीं किया गया है। 
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श्री पारस अस्पताल प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
श्री पारस अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को शनिवार को जब्त किया जाएगा। पुलिस ने प्रशासन से सील अस्पताल से डीवीआर निकालने की अनुमति ले ली है। अमर उजाला ने इस मुद्दे पर 25 जून को खबर प्रकाशित की थी। एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि शनिवार को सुबह 11 बजे डीवीआर को जब्त करने के लिए पुलिस प्रशासन की टीम पहुंचेगी। डीवीआर को जब्त करने के बाद फोरेंसिक साइंस लैब भेजा जाएगा। इसमें 26, 27 और 28 अप्रैल के फुटेज को देखा जाएगा। इसकी रिपोर्ट लैब से ली जाएगी।

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श्री पारस अस्पताल: चिकित्सक डॉ. अरिंजय जैन (सफेद शर्ट में) - फोटो : अमर उजाला
पुलिस के मुताबिक, श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिंजय जैन ने बयान दिया है कि सीसीटीवी फुटेज की रिकॉर्डिंग सात दिन तक ही रहती है। इसके बाद का बैकअप उनके पास नहीं है। इस कारण पुलिस ने अब तक सीसीटीवी फुटेज नहीं देखे। तथाकथित बयान वाले वीडियो में 26 अप्रैल को मॉकड्रिल की बात कही गई थी। दो महीने पुराने फुटेज निकालने के लिए पुलिस फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद लेगी। इसे फोरेंसिक लैब भेजेंगे। इसमें यह भी पता चल जाएगा कि फुटेज कितने दिन के रह सकते हैं, यह भी पता चलेगा कि फुटेज स्वत: ही मिट गए या फिर उन्हें मिटाया गया, यह तथ्य फोरेंसिक जांच में सामने आ सकता है। 
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श्री पारस अस्पताल प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
जांच के मुख्य बिंदु
- अस्पताल में 26 और 27 अप्रैल को कितने कर्मचारी थे, उनसे पूछताछ की जाए। अलग-अलग बयान लिए जाएं।
- सीसीटीवी कैमरों के फुटेज चेक किए जाएं, डीवीआर को कब्जे में लेकर फोरेंसिक लैब भेजा जाना चाहिए।
- अगर, डीवीआर में फुटेज मिलते हैं तो अस्पताल में भर्ती मरीज और कितने शव निकाले गए?, यह देखा जा सकता है।
- अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज भर्ती थे, तीमारदार बाहर रहते थे, तीमारदारों और ठीक हो चुके मरीजों से भी पूछताछ होनी चाहिए।
- अस्पताल के बाहर एंबुलेंस चालक भी रहते थे, शवों को कई बार लोग इन्हीं एंबुलेंस से लेकर जाते थे। उन चालकों से भी पूछताछ की जानी चाहिए।
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