दोबारा पैकिंग एक्सपायर दवाइयों को बेचने वाले आगरा के प्रदीप राजौरा और धीरज राजौरा का नेटवर्क पूरे ब्रज क्षेत्र में फैला हुआ था। उनसे पूछताछ में ड्रग विभाग को पता चला कि वे आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, कासगंज, एटा, मैनपुरी, हाथरस और अलीगढ़ में झोलाछापों को ये दवाएं बेचते थे। दस टैबलेट का जो पत्ता 15 रुपये (प्रति टैबलेट 1.5 रुपये) में तैयार होता था। उसे झोलाछाप को 125 रुपये (प्रति टैबलेट 12.5 रुपये) में बेचते थे। वह इसे एमआरपी पर मरीजों को देता था। एमआरपी 250 रुपये (प्रति टैबलेट 25 रुपये) होती थी। इसी तरह यह धंधा सालभर से चल रहा था।