मुगलकाल में बनी आगरा की मंडियों में से एक नून की मंडी (नमक की मंडी) की पहचान पूरी तरह बदल चुकी है। मुगलकाल में नमक के व्यापार के लिए भी अलग से मंडी बनाई गई थी। नाम पड़ा नमक की मंडी लेकिन आज यहां नमक का नहीं, सोने-चांदी और हीरे-जवारहात का व्यवसाय होता है। यह मंडी स्वतंत्रता संग्राम की भी गवाह रही है।
बादशाह अकबर के दौरान में आगरा किला के पास ही यह मंडी बनाई गई। इसे आम बोलचाल में नून की मंडी कहा जाता था। नमक का थोक और फुटकर दोनों तरह का व्यापार था।
मुगल दौर तक यहां नमक का कारोबार ही हुआ लेकिन बाद में अन्य दुकानें खुलीं तो स्वरूप बदलता चला गया। इतिहास की किताबों में इस मंडी का जिक्र मिलता है। अंग्रेजों के समय में यह सिर्फ नाम की नमक की मंडी रह गई। अन्य व्यापार जोर पकड़ गए।