आगरा मेट्रो ट्रेन अपने आप ट्रैक पर दौड़ेगी। ड्राइवर भी होगा, लेकिन आकस्मिक स्थिति में ट्रेन के दरवाजे खोलने व बंद करने के लिए। ट्रेन का संचालन स्वचालित नियंत्रण प्रणाली (सीबीटीसी) से होगा। इसके लिए सिग्नल लगाने का काम पीएसी मैदान में बन रही डिपो में शुरू हो गया है। यहां, फरवरी 2023 में मेट्रो का सबसे पहले ट्रायल होगा।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने डिपो परिसर में ट्रैक पर शंट व सिग्नल लगाने का काम शुरू कर दिया है। यहां तीन किमी. ट्रैक बिछ चुका है। सिग्नल का प्रयोग ट्रेन संचालन में होगा। कॉरपोरेशन के परियोजना निदेशक अरविंद राय ने बताया कि पूरी ट्रेन स्वचालित तकनीक पर आधारित होगी। कमांड सेंटर से संचालन होगा। सीबीटीसी सिग्नल एक ट्रेन से दूसरी ट्रेन की दूरी, संचार व ट्रैकिंग व्यवस्था पर नजर रखेंगे। मेट्रो अपने आप चलेगी। ड्राइवर संचालन नहीं करेगा। ड्राइवर का काम आकस्मिक स्थिति में ट्रेन के दरवाजों को खोलने व बंद करने का होगा।
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आगरा मेट्रो
- फोटो : अमर उजाला
सीबीटीसी ट्रेन संचालन की सबसे उन्नत तकनीक है। पारंपरिक सिग्नल रेलवे में होते हैं, मेट्रो में कम्यूनिकेशन बेस्ड कंट्रोल सिस्टम काम करता है। सीबीटीसी सिग्नल से ट्रैक पर दौड़ रही ट्रेनों के बीच संपर्क रहेगा। अप और डाउन लाइन पर प्रत्येक ट्रेन में लगे उपकरण की मदद से कमांड सेंटर से संचालन होगा।
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आगरा मेट्रो
- फोटो : अमर उजाला
मेट्रो के सिग्नल रेलवे के सिग्नल से बिल्कुल अलग होंगे। इसमें ट्रेन चलने पर गति के साथ आगे बढ़ने के लिए हरा रंग, रुकने के लिए लाल और सावधानी के लिए बैंगनी रंग प्रयोग हो रहा है। डिपो में ट्रेन के लिए अत्याधुनिक कमांड सेंटर बन रहा है। जिसमें स्कॉडा सिस्टम होगा। जो स्वत: ट्रेन का संचालन करेगा।
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प्रगति पर है आगरा मेट्रो का कार्य
- फोटो : अमर उजाला
साथ ही ट्रेन में लगे सीसीटीवी कैमरों से पूरे कॉरिडोर पर नजर रखी जाएगी। आगरा में 2024 तक ताजूपर्वी गेट से जामा मस्जिद तक 6 स्टेशन के बीच ट्रेन के ट्रायल का लक्ष्य है।