ताज महोत्सव में जानी मानी गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने आज रंग है री मां रंग है री और जनक के घर लली भई बधाई हो....जैसी प्रस्तुतियां देकर समा बांध दिया। उनके गीतों पर देर रात तक श्रोता झूमते रहे। ताज महोत्सव में मालिनी अवस्थी की प्रस्तुति के लिए दर्शक शाम से ही सीटों पर आकर जम गए थे, लेकिन वह अन्य कलाकारों की प्रस्तुतियों के बाद रात 10 बजे के बाद वह मंच पर आईं।
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मालिनी अवस्थी
- फोटो : अमर उजाला
भोजपुरी में गणेश वंदना वक्रतुंड महाकाय के बाद माय को मना लाई ओ...से शुरुआत की। इसके बाद लोक गीत जनक के घर लली भई बधाई हो, वसंत पर आधारित गीत आज रंग है री मां रंग है री....से महफिल को ऊंचाईयों पर पहुंचाया। इसके बाद एक के बाद कई गीतों पर श्रोता झूमते रहे।
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बेहतरीन परफॉर्मेंस से जीत लिया दिल
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इसके पहले ताज महोत्सव के मुक्ताशीय मंच पर सोमवार को बॉलीवुड गायिका भूमिका यादव और हार्दिक कृष्णवंशी ने सुरों को साधा। भूमिका ने तुम मेरे आसमां, मेरी जमीं बन गए, मेरी नजर का सफर, तुझपे ही आके रुके की प्रस्तुति दी। हार्दिक ने सनम रे, सनम रे की प्रस्तुतियां देकर समां बांधा। डॉ. सुजाता अग्रवाल ने जैसी हो, वैसी ही आ जाओ, शृंगार को रहने दो.. की प्रस्तुति दी।
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मनमोहक दृश्य
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इसी क्रम में वियतनाम से आई नन्हीं नृत्यांगना निष्ठा गुप्ता ने शिव तांडव की जोरदार प्रस्तुति देकर समा बांधा। निष्ठा ने त्रिशूल के साथ शिव की वेशभूषा में तांडव करके दर्शकों की वाहवाही लूटी। इसके बाद गढ़वाल कुमायूंनी के लोक संगीत को नई पहचान देने वाली पद्मश्री बसंती बिष्ट ने उत्तराखंड की लोक गायन शैली जागर की प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने शिव आराधना और पार्वती आराधना की।
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गजल गायन
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डॉ. एचपी सिंह ने गजल गायन किया तो पंडित डालचंद शर्मा ने पखावज वादन की प्रस्तुति दी। रंगलोक सांस्कृतिक संस्थान के कलाकारों ने छत्रपति शिवाजी नृत्य नाटिका का मंचन करके दर्शकों को बांधे रखा। नाटिका में शिवाजी महाराज के मुगलों से लोहा लेने से लेकर उनके राज्याभिषेक तक का चित्रण किया गया। कलैवानी राजमोहन ने भरत नाट्यम की प्रस्तुति दी। संचालन गजल गायक सुधीर नारायण और सुशील सरित ने किया।
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नृत्य कर बांध दिया समा
- फोटो : अमर उजाला
वहीं सदर बाजार के मुक्ताकाशीय मंच पर सोमवार से सांस्कृतिक कार्यक्रम की शृंखला का शुभारंभ छावनी उपाध्यक्ष डॉ. पंकज महेंद्रू ने किया। सुधीर नारायण के थीम सांग से शुरुआत हुई। इसके बाद फतेहपुरसीकरी से आए अजीज चिश्ती ने मौला सलीम चिश्ती, तोसे नैना मिलाके जैसी सूफियाना कव्वाली से समा बांधा।
रसरंग संस्था की ओर से बृज के लोक नृत्यों के साथ ही तनुप्रिया ने नृत्य की प्रस्तुति दी। लक्ष्मी नारायण, विकास शर्मा ने गीत प्रस्तुत किए तो आशा स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्राच्य संगीत कला केंद्र के कलाकारों ने समूह नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद पंडित मनीष शर्मा ने भजनों की प्रस्तुति दी। साईंनाथ मेरे आजा, सतगुरु, कान्हा रे कान्हा रे जैसे भजन प्रस्तुत किए।