आगरा किला के जिस मीना बाजार में जहांगीर-नूरजहां के बीच मोहब्बत पनपी, खंडहर में बदल चुके उस मीना बाजार की सूरत संवर रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मीना बाजार का दो तिहाई हिस्सा संरक्षित कर लिया है। सेना के कब्जे वाले किले के हिस्से में मौजूद मीना बाजार में एएसआई ने लाखौरी ईंटों का मूल फर्श निकालने के साथ पुराना ड्रेनेज सिस्टम और कमरों को मूल स्थिति में संरक्षित किया है। बाकी एक तिहाई हिस्से का काम मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। ऊंची ऊंची घास और मलबे से खंडहर में तब्दील हो चुका मीना बाजार अब मुगलिया शैली के उसी स्वरूप में नजर आने लगा है, जैसा जहांगीर के समय में नजर आता था।
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मीना बाजार की पहले की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
बना दिया था 75 बेड का अस्पताल
अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत के दौरान किले के अंदर दिल्ली गेट से सटे मीना बाजार को अस्पताल में बदल दिया गया था। यहां 75 बेड का अस्पताल तैयार किया गया था।
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मीना बाजार
- फोटो : अमर उजाला
सर्वेंट हॉस्पिटल की पट्टिका अब तक यहां लगी है। घायल ब्रिटिश जवानों को लाने के लिए एंबुलेंस खड़ी करने की जगह भी यहां निर्धारित थी। एंबुलेंस से मरीज उतारने में दिक्कत न हो, इसलिए मीना बाजार की दुकानों के आगे 6 फुट तक मलबा डालकर प्लेटफॉर्म बनाया गया। एएसआई ने उसी मलबे को हटवाया है। नीचे लाखौरी ईंटों का फर्श निकला है, जो मलबे में दब गया था।
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मीना बाजार की ताजा तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
मीना बाजार की दुकानों के प्लेटफार्म और सड़क के बीच शानदार ड्रेनेज सिस्टम बना हुआ था, जो मलबे से ध्वस्त हो गया। एएसआई ने उसे भी मूल रूप में संरक्षित किया है। तीन हिस्सों वाले किले के मीना बाजार का एक हिस्सा सर्वेंट हॉस्पिटल, दूसरा हिस्सा गैरीसन सर्वेंट के लिए बनाया गया था। मीना बाजार के प्रवेश द्वार की दीवारें इतनी मोटी हैं कि उस पर से सेना के ट्रक निकलते रहे। एएसआई की आपत्ति के बाद ट्रकों की आवाजाही बंद कराई गई।
आगरा किला में लाइट एंड साउंड शो के दौरान की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
तीन में से दो हिस्से संरक्षित
मीना बाजार के तीन में से दो हिस्सों का संरक्षण कार्य हो चुका है। लाखौरी ईंटों का मूल फर्श निकालने के साथ मीना बाजार का मूल स्वरूप लौटाया है। तीसरे हिस्से का काम भी शुरू कर रहे हैं। यहां ब्रिटिश राज में मलबा डालकर मीना बाजार को अस्पताल में बदल दिया गया था। - वसंत कुमार स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद