मथुरा के सुरीर कोतवाली में पत्नी संग खुद को आग लगाने वाले जोगेंद्र ही नहीं सिस्टम से हारी एक बेटी भी अपनी जान दे चुकी है। शहर की अमर कालोनी में आठ मार्च 2017 में हुई डकैती की वारदात में बनवारी और उसकी पत्नी रविबाला की हत्या कर दी गई थी। मां-बाप को इंसाफ दिलाने के लिए बेटी राखी ने भी जान दे दी थी, लेकिन इंसाफ नहीं मिला।
विज्ञापन
2 of 5
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
हत्याकांड का खुलासा न होने पर बेटी राखी ने भूख हड़ताल और आंदोलन किया था, पर उसको सिस्टम ने न्याय नहीं दिया। आखिरकार सिस्टम से हारी राखी ने अपनी जान गवां दी थी। ढाई साल से अधिक इस वारदात को हो गए, पर आज तक यह दोहरा हत्याकांड और डकैती की वारदात अनसुलझी रह गई है।
विज्ञापन
3 of 5
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
यह कोई पहले मामला नहीं बल्कि सिस्टम से हारकर कई पीड़ित डीएम और एसएसपी कार्यालय पर पेट्रोल छिड़कर आत्मदाह की कोशिश को पहुंच चुके हैं। बावजूद इन पीड़ितों को आजतक न्याय नहीं मिला। कई बार तो न्याय मांगने वाले पीड़ितों के खिलाफ ही मुकदमे दर्ज करा दिए। आखिर पीड़ित न्याय के लिए किस चौखट पर दस्तक दें, जिससे की उसे न्याय मिल सके।
4 of 5
मौत के बाद जागेंद्र के घर जाते पुलिस-प्रशासन के अफसर
- फोटो : अमर उजाला
हर रोज थानों पर पहुंचने वाले लोग भगाए जा रहे हैं। थानों पर हंगामे कर रहे हैं। बीते दिन वृंदावन कोतवाली में भी महिला ने हंगामा किया था। वो अपने पति की गुमशुदगी दर्ज करा चुकी लेकिन पुलिस आज तक उसकी तलाश नहीं कर पाई। दुष्कर्म की पीड़िता आरोपी की गिरफ्तारी न होने से आत्मदाह की धमकी दे रही हैं। मांट में दो दिन पहले एक महिला अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर पहुंच गई थी।
सुरीर कोतवाली में दंपती द्वारा खुद आग लगाने की घटना भी सिस्टम के नाकामी का नतीजा है। मृतक जोगेंद्र के परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस न्याय दिलाती तो यह घटना नहीं होती और घर न उजड़ता। जो कार्रवाई पुलिस ने बाद में की वो पहले भी की जा सकती थी।