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जिंदगी के रास्तों पर एक बेटी के संघर्ष का सफर, ई-रिक्शा चलाकर पाल रही परिवार

Sat, 08 Dec 2018 01:44 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोवर्धन (मथुरा)
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ई-रिक्शा चलाती प्रीति - फोटो : अमर उजाला
बेटा ही नहीं बेटी भी परिवार का पालन-पोषण कर सकती है। मथुरा के राधाकुंड में ऐसी ही एक बेटी ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही है। वो असल में 'अपराजिता' है, जिसे विपरीत हालत भी हरा नहीं सके। वो सभ्य समाज के लिए मिसाल है तो उन लोगों के लिए सबक, जो बेटियां को बोझ समझते हैं। 
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जिंदगी के रास्तों पर एक बेटी के संघर्ष का सफर, ई-रिक्शा चलाकर पाल रही परिवार

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ई-रिक्शाचालक प्रीति - फोटो : अमर उजाला
प्रीति जिसके कंधों पर 18 वर्ष की उम्र में ही परिवार की परवरिश की जिम्मेदारी आ पड़ी है। इस जिम्मेदारी को वो शिक्षा के अभाव में ई-रिक्शा चला कर निभा रही है। राधाकुंड के जाटवान मोहल्ले की प्रीति ई-रिक्शा चला कर अपने माता-पिता, दो छोटी बहनों और दो छोटे भाइयों की परवरिश कर रही है। 
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जिंदगी के रास्तों पर एक बेटी के संघर्ष का सफर, ई-रिक्शा चलाकर पाल रही परिवार

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ई-रिक्शा चलाती प्रीति - फोटो : अमर उजाला
प्रीति ने बताया की उसके पिता मानसिक रोगी हैं। पिता का इलाज एवं परिवार पालने के लिए उसे ई-रिक्शा चलाने का सहारा लेना पड़ा। सरकार व प्रशासन ने उसके परिवार को किसी प्रकार की मदद उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। 

जिंदगी के रास्तों पर एक बेटी के संघर्ष का सफर, ई-रिक्शा चलाकर पाल रही परिवार

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ई-रिक्शा चलाती प्रीति - फोटो : अमर उजाला
प्रीति अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। वो दिन में रोजाना आठ घंटे रिक्शा चला कर अपने परिवार व पिता के इलाज के लिए धनराशि जुटा रही है। छोटे भाई, बहनों पढ़ा भी ही है। प्रीति अपने रिक्शे से बाहर से आने वाले यात्रियों को गिरिराज परिक्रमा तथा धार्मिक स्थलों के दर्शन कराती है। यह उसकी दिनचर्या बन गया है। 
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ई-रिक्शा चलाती प्रीति - फोटो : अमर उजाला
प्रीति की मेहनत और इच्छाशक्ति देख लोग भी उसकी तारीफ करते हैं। पढ़ाई के सवाल पर प्रीति कहती है कि वो पढ़ना तो चाहती है, लेकिन घर में कोई कमाने वाला नहीं है। इसलिए वो रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रही है। 
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