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पीएफ नियम में बड़ा बदलाव: क्या 25 हजार से अधिक सैलरी वाले कर्मचारी का नहीं कटेगा पीएफ? जानें नियम

Thu, 17 Sep 2026 01:48 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

PF Deduction Rules Above 25000 Basic Salary: सरकार ने पीएफ से जुड़े नियम में बदलाव किया जिसे लेकर बहुत से लोगों के मन में कई सवाल हैं, इसी कड़ी में एक बड़ा सवाल ये है कि क्या अगर किसी का 25 हजार से अधिक इन-हैंड सैलरी है तो उसका पीएफ नहीं कटेगा। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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25 हजार से अधिक सैलरी पीएफ नियम - फोटो : AI
PF Deduction Rules Above 25000 Basic Salary: केंद्र सरकार द्वारा ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने के फैसले के बाद कई कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या 25,000 रुपये से अधिक वेतन पाने वालों का पीएफ नहीं कटेगा? इस नियम को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना बेहद जरूरी है।

असल में 25,000 रुपये की यह सीमा सिर्फ 'अनिवार्य पीएफ कवरेज' के लिए तय की गई है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 25,000 रुपये से अधिक कमाने वालों का पीएफ नहीं कट सकता।

सबसे पहले इन-हैंड सैलरी और बेसिक सैलरी के बीच के अंतर को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि सरकार का 25,000 रुपये का पीएफ नियम इन-हैंड सैलरी पर नहीं, बल्कि बेसिक सैलरी + डीए पर लागू होता है। आइए इसे रमेश और पूजा के उदाहरण से बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।

ईपीएफओ कर्मचारी ध्यान दें: सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला, पीएफ में क्या बदला और क्या नहीं; यहां जानें
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इन-हैंड सैलरी और बेसिक सैलरी का स्ट्रक्चर समझें - फोटो : AdobeStock
इन-हैंड सैलरी और बेसिक सैलरी का स्ट्रक्चर समझें
  • जब किसी कंपनी में सैलरी तय होती है, तो उसके कई हिस्से होते हैं-जैसे बेसिक सैलरी, डीए (महंगाई भत्ता), एचआरए (मकान किराया भत्ता), और अन्य अलाउंस।
  • इन हैंड सैलरी वह कुल पैसा है जो महीने के अंत में सारे कटौतियों के बाद आपके बैंक खाते में आता है। बेसिक सैलरी + डीए आपकी सैलरी एक मुख्य हिस्सा होता है, जिस पर पीएफ की गणना की जाती है।
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रमेश और पूजा के आसान उदाहरण से समझें - फोटो : AI
रमेश और पूजा के आसान उदाहरण से समझें
  • इसको रमेश और पूजा के उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए रमेश और पूजा एक कंपनी में काम करते हैं और वहां रमेश की इन हैंड सैलरी 26 हजार रुपये है, वहीं पूजा की इन हैंड सैलरी 38 हजार रुपये है।
  • अब रमेश की बेसिक सैलरी + डीए की बात करें तो वह राशि 16,000 रुपये आती है।
  • चूंकि रमेश का बेसिक + डीए (16,000 रुपये) है तो सरकार की तय अनिवार्य सीमा (25,000 रुपये) से कम है, इसलिए रमेश का पीएफ कटना कानूनन अनिवार्य होगा।
  • हालांकि रमेश की कुल इन-हैंड सैलरी 25,000 रुपये से ज्यादा दिख रही है, फिर भी उन्हें अनिवार्य पीएफ का पूरा फायदा मिलेगा और कंपनी भी उनके पीएफ खाते में बराबर का योगदान देगी।

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पूजा का उदाहरण - फोटो : AdobeStock
पूजा का उदाहरण
  • पूजा की हर महीने हाथ में आने वाली इन-हैंड सैलरी 38,000 रुपये है। जब उनकी सैलरी स्लिप में बेसिक सैलरी और डीए को जोड़ा जाता है, तो वह राशि 26,000 रुपये बनती है।
  • चूंकि पूजा का बेसिक + डीए (26,000 रुपये) जो कि सरकार की तय 25,000 रुपये की सीमा को पार कर चुका है, इसलिए कंपनी के लिए उनका पीएफ काटना अनिवार्य नहीं होगा।
  • अगर पूजा अगर चाहें, तो अपनी कंपनी से बात करके अपनी मर्जी से (Voluntary PF के तहत) पीएफ कटवा सकती हैं, लेकिन सरकार की तरफ से उन पर यह बाध्यता लागू नहीं होगी।
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पीएफ का नया नियम - फोटो : AdobeStock
  • कहने का मतलब यही है कि चाहे आपकी इन-हैंड सैलरी 30,000 रुपये हो या 40,000 रुपये। अगर आपकी सैलरी स्लिप में बेसिक + डीए 25,000 रुपये या उससे कम है, तो आपका पीएफ जरूर कटेगा।
  • वहीं अगर आपकी सैलरी 35,000 ही हो मगर अपकी बेसिक सैलरी + डीए 25,000 से अधिक है तो आपका पीएफ कटना अनिवार्य नहीं है, आप चाहें तो वैकल्पिक रुप से कटवा सकते हैं।
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