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Cyber Insurance: क्या बैंक अकाउंट के लिए साइबर बीमा जरूरी या नहीं? यहां समझें

Mon, 23 Mar 2026 08:40 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Individual Cyber Insurance India: आज के समय देश भर में साइबर क्राइम की संख्या हर साल तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में डर रहता है कि कहीं उनके साथ बैंक फ्रॉड न हो जाए। इस स्थिति से बचने के लिए साइबर इंश्योरेंस एक अच्छा विकल्प हो सकता है। आइए जानते हैं।
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बैंक लॉकर का इंश्योरेंश - फोटो : Adobe Stock
Protecting Bank Account From Cyber Fraud: डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल ने हमारे देश में वित्तीय लेन-देन को आसान बनाया है। मगर इसके साथ ही साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। अक्सर लोगों के मन में ये डर रहता है कि कहीं उनके बैंक अकाउंट से किसी भी तरह की धोखाधड़ी न हो जाए। डिजिटल बैंकिंग के दौर में उपभोगता की एक छोटी सी गलती भी उसका बैंक अकाउंट खाली कर सकती है। 

अगर आप भी फिशिंग, सिम स्वैपिंग या किसी फर्जी लिंक पर क्लिक करने के कारण अपनी मेहनत की कमाई गंवाते हैं, तो उस पैसे का वापस मिलना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में 'साइबर इंश्योरेंस' एक विकल्प के तौर पर उभर कर सामने आ रहा है।

आज के हाई-टेक दौर में, जहां 'डिजिटल अरेस्ट' और एआई-आधारित वॉयस स्कैम आम हो गए हैं, ऐसे में कुछ लोग साइबर बीमा पॉलिसी ले रहे हैं। ये न सिर्फ आपकी बचत को सुरक्षित रखता है बल्कि कानूनी लड़ाई और डेटा रिकवरी में होने वाले भारी खर्चों से भी राहत दिलाता है।
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बैंक लॉकर का इंश्योरेंश - फोटो : Adobe Stock
साइबर बीमा में क्या-क्या कवर होता है?
  • वैसे तो साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी कई तरह की होती हैं। मगर आमतौर पर साइबर इंश्योरेंस बैंक से चोरी हुए पैसों के अलावा अन्य भी जोखिम को भी कवर करते हैं।
  • यह चोरी, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, और ई-मेल स्पूफिंग से होने वाले नुकसान को भी कवर करती है।
  • अगर कोई आपके नाम पर फर्जी लोन ले ले या आपके क्रेडिट कार्ड का गलत इस्तेमाल करे, तो बीमा कंपनी उस वित्तीय हानि की भरपाई करती है।
  • इसके अलावा कुछ पॉलिसी तो साइबर हमले के बाद होने वाले मानसिक तनाव के लिए 'काउंसलिंग' का खर्च भी कई कंपनियां उठाती हैं।
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बैंक - फोटो : Adobe Stock
बैंक की सुरक्षा बनाम व्यक्तिगत साइबर बीमा
  • ध्यान रखें बैंक सिर्फ अपनी सुरक्षा प्रणाली के टूटने पर ही मुआवजा देने के लिए बाध्य हैं।
  • लेकिन अधिकांश साइबर फ्रॉड ग्राहक की मानवीय गलती जैसे ओटीपी शेयर करने या असुरक्षित वाई-फाई इस्तेमाल करने से होते हैं।
  • ऐसी स्थिति में बैंक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। व्यक्तिगत साइबर बीमा यहीं काम आता है, क्योंकि यह आपकी अपनी गलतियों से होने वाले जोखिमों को भी कवर करता है, जो सामान्य बैंकिंग नियमों के दायरे में नहीं आते हैं।

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पॉलिसी लेते इन बातों का ध्यान रखें - फोटो : AdobeStock
पॉलिसी लेते समय प्रीमियम और शर्तों का ध्यान रखें
 
  • व्यक्तिगत साइबर बीमा का वार्षिक प्रीमियम काफी कम होता है, आमतौर पर ₹500 से ₹2,000 के बीच।
  • पॉलिसी चुनते समय 'सब-लिमिट' और 'वेटिंग पीरियड' को ध्यान से पढ़ें। सुनिश्चित करें कि पॉलिसी में 'फिशिंग' और 'विशिंग' जैसे आधुनिक खतरे शामिल हों।
  • आज के समय में कई कंपनियां 'फैमिली फ्लोटर' साइबर प्लान भी दे रही हैं, जिससे एक ही प्रीमियम में घर के बच्चों और बुजुर्गों के गैजेट्स को भी सुरक्षित किया जा सकता है।
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पॉलिसी लेते इन बातों का ध्यान रखें - फोटो : AdobeStock
क्या यह आपके लिए जरूरी है?
  • अगर आप नियमित रूप से ऑनलाइन शॉपिंग, नेट बैंकिंग या यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए साइबर बीमा एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
  • यह आपको एक ऐसी सुरक्षा देता है जो बैंक या मोबाइल वॉलेट नहीं दे सकते। जैसे-जैसे अपराधी तकनीक का सहारा ले रहे हैं, वैसे ही हमें भी अपनी वित्तीय सुरक्षा की ढाल को मजबूत करना होगा।
  • आज ही अपनी डिजिटल आदतों का मूल्यांकन करें और एक छोटी सी प्रीमियम राशि देकर अपने बैंक अकाउंट और डिजिटल पहचान को 'हैक-प्रूफ' सुरक्षा प्रदान करें।
  • ध्यान रखें सावधानी ही बचाव है, लेकिन बीमा उस सावधानी का सबसे मजबूत बैकअप है।

नोट- यह खबर केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। साइबर बीमा का चयन करने से पहले संबंधित पॉलिसी के नियम व शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ें। लेखक या संस्थान किसी भी विशिष्ट बीमा प्लान या कंपनी की पुष्टि या सिफारिश नहीं करते हैं। वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा कोई भी निर्णय अपनी व्यक्तिगत आवश्यकता और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही लें।
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