भारत सरकार साल 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करना चाहती है। इसको लेकर सरकार कई दिशा में काम कर रही है, यही नहीं भारत सरकार नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर भी काम कर रही है। ऐसे में आपको इस बारे में जानना जरूरी है कि आखिर ग्रीन हाइड्रोजन है क्या?
हम सभी जानते हैं कि पानी H2O से बना होता है। इसमें हाइड्रोजन के 2 और ऑक्सीजन का 1 अणु होता है। अगर इन्हें इलेक्ट्रोलाइजर की मदद से अलग किया जाए, तो हाइड्रोजन अलग हो जाता है। इलेक्ट्रोलाइजर एक खास मशीन होती है, जो बिजली के करंट से अणुओं को तोड़ती है। ग्रीन हाइड्रोजन आमतौर पर वहीं तैयार किया जाता है, जहां भरपूर धूप, तेज हवा और पर्याप्त पानी उपलब्ध हो। इसी कारण इसके प्लांट रेगिस्तानी इलाकों, समुद्र किनारे या बड़े सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स के पास लगाए जाते हैं।