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क्या इंफ्लुएंसर्स को भी देना पड़ता है टैक्स? जानें सोशल मीडिया से होने वाली कमाई के नियम

Mon, 28 Sep 2026 08:08 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Youtube Instagram Income Tax Guidelines: आज के समय बहुत से लोगों के फ्यूचर प्लानिंग में कंटेट क्रिएटर बनने का सपना होता हैं। ऐसे में लोगों को ये स्पष्ट नहीं रहता है कि सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर में जो कमाई होती है, उसपर टैक्स कैसे लगता है? आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर इनकम टैक्स - फोटो : AI
Social Media Influencer Tax Rules India: आजकल इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स से कमाई करना एक बड़ा करियर बन चुका है। लेकिन अक्सर डिजिटल क्रिएटर्स और दर्शकों के मन में यह भ्रम रहता है कि सोशल मीडिया की कमाई पर टैक्स नहीं लगता। इनकम टैक्स विभाग के अनुसार, अगर आप ब्रांड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप, एफिलिएट मार्केटिंग या व्यूज से पैसे कमाते हैं, तो इस पर नियमानुसार टैक्स चुकाना अनिवार्य है।

इसके अलावा, ब्रांड्स से मिलने वाले महंगे फ्री प्रोडक्ट्स, कार या स्पॉन्सर्ड ट्रिप्स पर भी टैक्स की देना पड़ता है। आइए इस लेख में इसी से जुड़ी कुछ जरुरी बातें समझते हैं, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
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ब्रांड एंडोर्समेंट और स्पॉन्सरशिप पर टैक्स के नियम - फोटो : एआई जनरेटेड
ब्रांड एंडोर्समेंट और स्पॉन्सरशिप पर टैक्स के नियम
  • सोशल मीडिया से मिलने वाली हर तरह की फीस या कमीशन को 'बिजनेस एंड प्रोफेशन से आय' माना जाता है।
  • अगर आपकी कुल सालाना आय टैक्स छूट की सीमा से अधिक है, तो आपको अपनी स्लैब के अनुसार इनकम टैक्स देना होगा।
  • इसके अलावा, आपको समय पर अपना आयकर रिटर्न फाइल करना भी आवश्यक है।
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सेक्शन 194R के तहत फ्री गिफ्ट्स और TDS का नियम - फोटो : Adobe Stock
सेक्शन 194R के तहत फ्री गिफ्ट्स और TDS का नियम
  • आयकर अधिनियम के सेक्शन 194R के तहत, अगर कोई कंपनी इंफ्लुएंसर को 50,000 रुपये से अधिक मूल्य का कोई फ्री गिफ्ट (जैसे मोबाइल, कार या इंटरनेशनल ट्रिप) देती है, तो उस पर 10% की दर से TDS कटता है।
  • अगर आप प्रोडक्ट इस्तेमाल के बाद कंपनी को वापस लौटा देते हैं, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा।

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जीएसटी रजिस्ट्रेशन कब और किसके लिए जरूरी है? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
जीएसटी रजिस्ट्रेशन कब और किसके लिए जरूरी है?
  • अगर एक वित्तीय वर्ष में किसी सोशल मीडिया क्रिएटर की कुल कमाई 20 लाख रुपये (विशेष राज्यों में 10 लाख रुपये) से अधिक हो जाती है, तो उन्हें जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।
  • इसके बाद सभी स्पॉन्सरशिप बिलों पर 18% की दर से जीएसटी चार्ज करना और जमा करना पड़ता है।
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बिजनेस एक्सपेंस दिखाकर बचा सकते हैं अपना कानूनी टैक्स - फोटो : Adobe Stock
बिजनेस एक्सपेंस दिखाकर बचा सकते हैं अपना कानूनी टैक्स
  • क्रिएटर्स अपनी कमाई पर टैक्स घटाने के लिए कानूनी रूप से खर्चों का दावा कर सकते हैं।
  • वीडियो बनाने में इस्तेमाल हुए कैमरा, माइक, लैपटॉप, इंटरनेट बिल, एडिटर्स की सैलरी और स्टूडियो के किराए को आप बिजनेस एक्सपेंस के रूप में दिखाकर अपनी कुल कर योग्य आय को काफी कम कर सकते हैं।
  • बता दें कि इसकी प्रक्रिया थोड़ी लंबी होती है, जिसके लिए कई बार अच्छे सीए की जरूरत पड़ सकती है।
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