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2008 और 2012 के ओलंपिक गेम्स में जब पदक से चूक गया भारत

Sat, 30 Jul 2016 05:11 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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Rio 2016 - फोटो : Getty
चार साल के लंबे इंतजार के बाद ओलंपिक गेम्स फिर से शुरू होने वाले हैं। दुनियाभर के खिलाड़ियों के साथ-साथ भारतीय खिलाड़ी भी खेलों के इस महाकुंभ में पदक के लिए अपनी चुनौती पेश करेंगे। लेकिन पिछले दो ओलंपिक गेम्स में कुछ मौके ऐसे भी आए जब खिलाड़ी पदक जीतने के करीब पहुंच गए थे लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लगी। जानते हैं 2008 (बीजिंग) और 2012 (लंदन) में ऐसे खिलाड़ियों को।
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2008 और 2012 के ओलंपिक गेम्स में जब पदक से चूक गया भारत

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- फोटो : Getty
लंदन ओलंपिक में डिस्कस थ्रोअर विकास गौड़ा ने ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में देश के लिए पदक की उम्मीद जगा दी थी। वह डिस्कस थ्रो के फाइनल में पहुंच गए थे, पदक की जंग में उन्होंने कड़ी चुनौती पेश की। लेकिन वह 64.79 मीटर दूर तक ही डिस्कस फेंक पाए और आठवें नंबर पर रहे।
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2008 और 2012 के ओलंपिक गेम्स में जब पदक से चूक गया भारत

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- फोटो : Getty
विकास गौड़ा के अलावा ट्रैक एंड फील्ड में महिला डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पुनिया भी फाइनल में प्रवेश कर गई थीं लेकिन वह 63.62 मीटर दूर तक ही डिस्कस फेंक सकीं जिससे पदक की करीब नहीं आ सकी। वह स्पर्धा में छठे नंबर पर रहीं।

2008 और 2012 के ओलंपिक गेम्स में जब पदक से चूक गया भारत

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पी कश्यप - फोटो : Getty
बैडमिंटन के एकल स्पर्धा में महिला वर्ग से साइना नेहवाल ने कांस्य पदक जीता था तो पुरुष वर्ग के एकल में पी कश्यप ने गजब का खेल दिखाकर पदक की उम्मीद जगा दी थी, लेकिन क्वार्टर फाइनल में हार ने उनके इतिहास रचने का मौका गंवा दिया।
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- फोटो : Getty
मुक्केबाजी में भी भारत को दो से ज्यादा पदक मिल सकते थे लेकिन दो मुक्केबाज क्वार्टर फाइनल में ही हार गए। लाइट फ्लाइवेट वर्ग में एल देवेंद्रो सिंह क्वार्टर फाइनल में पहुंच गए थे और अगर वह एक मुकाबला जीतकर सेमीफाइनल में पहुंच जाते तो पदक पक्का हो जाता।
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2008 और 2012 के ओलंपिक गेम्स में जब पदक से चूक गया भारत

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- फोटो : Getty
लाइट फ्लाइवेट वर्ग में एल देवेंद्रो सिंह के क्वार्टर फाइनल में हार के बाद बीजिंग ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता रहे विजेंदर सिंह से भी उम्मीद थी लेकिन वह भी क्वार्टर फाइनल में हार गए। जबकि इस बार उनसे बड़े पदक की आस थी।
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- फोटो : Getty
निशानेबाजी में जयदीप करमारकर ने 50 मीटर राइफल प्रोन में पदक के लिए काफी जोर लगाया था लेकिन बेहद मामूली अंतर से वह पदक से रह गए। फाइनल में उन्होंने 700 में से 699.1 अंक बनाए लेकिन यह शानदार प्रदर्शन भी उन्हें पदक नहीं दिला सका और चौथे स्थान पर रहे।

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2012 में लंदन में हुए ओलंपिक में तीरंदाज दीपिका कुमारी से पदक की काफी आस थी क्योंकि उस समय वह दुनिया की नंबर वन महिला तीरंदाज थीं लेकिन वह व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा में पहले ही दौर में बाहर हो गई थीं।
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2008 के बीजिंग ओलंपिक में टेनिस की अनुभवी जोड़ी लिएंडर पेस और महेश भूपति से पदक की बड़ी आस थी। लेकिन पुरुष युगल में पेस-भूपति का क्वार्टर फाइनल में मुकाबला स्विट्जरलैंड की जोड़ी रोजर फेडरर और स्टैनलिसास वावरिंका से था, जिसमें फेडरर ने अकेले अपने दम पर भारतीय जोड़ी की चलने नहीं दी। और भारत यह मैच 2-6, 4-6 से हार गया और पदक की रेस से बाहर हो गया।
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