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सौरभ चौधरी ने कोच की पिस्टल से लगाया था पहला निशाना, जानें कैसा था शूटिंग के 'सुल्तान' का संघर्ष

Fri, 09 Nov 2018 10:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सौरभ चौधरी शूटर - फोटो : अमर उजाला
कुवैत में खेली जा रही 11वीं एशियन एयरगन चैंपियनशिप में वीर शाहमल एकेडमी बिनौली के निशानेबाज और मेरठ के रहने वाले सौरभ चौधरी ने फिर स्वर्ण पदक जीता। सौरभ की कामयाबी पर एकेडमी में जश्न का माहौल है। कोच अमित श्योराण ने कहा कि सौरभ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर खुद को साबित कर दिखाया है। सौरभ लगातार कामयाबी की बुलंदियां छू रहे हैं। आगे जानें कैसा रहा उनका ये सफर :-
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कोच अमित श्यौरन व शूटर सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
कोच अमित श्योराण ने बताया कि सौरभ ने एकाग्रता और निरंतरता से यह कामयाबी हासिल की। ओलंपिक को ध्यान में रखकर वह तैयारी में जुटा है। सौरभ देश के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में है और बागपत को उस पर नाज है। सौरभ चौधरी के पदक जीतने पर एकेडमी में मिठाई बांटी गई। दूसरी तरफ सौरभ के गांव कलीना में खुशी का माहौल है। भाई नितिन चौधरी ने कामयाबी पर खुशी जताई। साथ ही गांव में मिठाई बांटी।
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सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
एशियाई खेलों के बाद बागपत के शूटर सौरभ चौधरी ने फिर इतिहास रच दिया। कलीना गांव का लाल बिनौली की वीर शाहमल राइफल एकेडमी में तपकर कुंदन बना और यूथ ओलंपिक में भी देश को सोना दिला दिया। एशियाई खेलों की बड़ी कामयाबी के बाद वह घर नहीं लौटे और कड़ी मेहनत की। इसके बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और अब कुवैत में खेली जा रही 11वीं एशियन एयरगन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। कामयाबी पर कोच अमित श्योराण ने कहा कि सौरभ चौधरी ने पदक का वायदा पूरा कर दिखाया। गौरतलब है कि अब तक सौरभ छह पदक जीत चुके है।

 

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बेटे के मेडल दिखातीं सौरभ चौधरी की मां - फोटो : अमर उजाला
मेरठ के कलीना गांव के 16 साल के निशानेबाज सौरभ चौधरी बागपत के बिनौली की वीर शाहमल शूटिंग एकेडमी में निशानेबाजी का अभ्यास करते है। इंडोनेशिया के जकार्ता में 21 अगस्त को 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने वाले होनहार ने पिछले दिनों में कई स्वर्ण पदक जीते हैं। एशियाई खेलों के बाद सौरभ ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में व्यक्तिगत गोल्ड समेत तीन पदक जीते थे। अब कुवैत में स्वर्ण पदक जीतकर खुद को विश्व स्तर पर साबित कर दिखाया। कोच अमित श्योरण कहते हैं कि एशियाई खेलों और विश्वकप के बाद यूथ ओलंपिक में समय कम बचा था, इस वजह से वह अभ्यास में जुटे रहे। 
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घर में भी शूटिंग की प्रैक्टिस करते हैं सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
छह पदक झटकने वाले सौरभ चौधरी की कामयाबी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। सिर्फ तीन साल में किसान का यह बेटा गोल्डन ब्वाय बन गया। कोच अमित श्योराण की पिस्टल से साल 2015 में दिल्ली में आयोजित 59वीं नेशनल चैंपियनशिप में यूथ वर्ग का गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद सौरभ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। परिवार ने साथ दिया और पिस्टल खरीदकर दी। सर्दी गर्मी बरसात हर मौसम में रोज 12 किमी का सफर टैंपो से करते हुए सौरभ कलीना से बिनौली तक जाता रहा और यहां करीब आठ घंटे तक नियमित अभ्यास करने से वह तपकर कुंदन बन गए। 

 
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सौरभ चौधरी के घर पर जश्न मनाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
स्वर्ण पदक विजेता सौरभ चौधरी के निजी कोच अमित श्योराण और उसके भाई नितिन चौधरी बताते हैं मार्च 2015 में कलीना गांव के किसान जगमोहन सिंह के बेटे सौरभ चौधरी ने शूटिंग सीखने की इच्छा जताई। अप्रैल 2015 में बड़े भाई नितिन चौधरी सौरभ को लेकर बिनौली पहुंचे और कोच अमित श्योराण से मिलकर एडमिशन कराया। यहां से शुरू हुआ सौरभ चौधरी की मेहनत और सफलता का सिलसिला। रेंज पर पहली बार पिस्टल देखी। शुरूआत अभ्यास के बाद कोच अमित श्योराण ने सौरभ को अपनी पिस्टल से खेलने का अवसर दिया। 
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सौरभ चौधरी की जीत का जश्न मनाते खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
कामयाबी मिलनी शुरू हुई तो कोच और परिवार ने सौरभ की प्रतिभा को परख लिया। साल 2016 में करेल के त्रिवेंद्रम में यूथ खेलों में सौरभ ने स्वर्ण पदक जीतकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। साल 2016 में कई विदेशी दौरे हुए, लेकिन पहली बड़ी कामयाबी मिली साल 2017 में 22 से 29 जून तक जर्मनी के सुहल में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में सौरभ ने स्वर्ण पदक जीता। उनकी  सफलताओं का सिलसिला अब तक जारी है। कोच की पिस्टल से खेलने वाले सौरभ को परिवार ने किसी तरह करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर पिस्टल दिलाई।

 
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आईओसी म्यूजियम में पिस्टल का प्रतिरूप रखा जाएगा 

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सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
भाई नितिन चौधरी बताते हैं कि सौरभ के जुनून को देखते हुए ही परिवार ने पिस्टल दिलाने का फैसला किया था। अपनी पिस्टल से उन्हें बेहद लगाव है। सौरभ खुलासा करते हैं कि लुजान म्यूजियम में उनकी पिस्टल का प्रतिरूप रखा जाएगा। वह स्विटजरलैंड की मोरनी कंपनी की पिस्टल इस्तेमाल करते हैं। आईओसी ने उनकी इस्तेमाल की जाने वाली मोरनी पिस्टल का सीरियल नंबर ले लिया है, जिसे वह कंपनी से निकलवाकर म्यूजियम में रखेंगे। यह पिस्टल उन्हीं के नाम से म्यूजियम में रखी जाएगी। 

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