फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी की शूटर दादी के सामने दिग्गज निशानेबाज हो जाते हैं फेल, 82 की उम्र में भी नहीं चूकता निशाना

Thu, 18 Oct 2018 06:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
1 of 8
शूटर दादी प्रकाशो तोमर
बयासी साल की उम्र में वह जब अपनी रिवॉल्वर तानकर निशाना लगाती हैं तो अच्छे अच्छे निशानेबाज उनके सामने फेल हो जाते हैं। देश विदेशों तक वह खेल प्रेमियों के लिए प्रेरणा हैं। उनकी शोहरत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अब गूगल सर्च में भी नजर आती हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं यूपी के बागपत की 'शूटर दादी' के बारे में। यूपी के बागपत की शूटर दादी  ने समाज की तमाम प्रथाओंं को दरकिनार कर नई मिसाल पेश कर दिखाई है। इन्हीं शूटर दादी से आज हम आपको तस्वीरों के जरिए रूबरू करा रहे हैं :-
विज्ञापन

उम्र की बात छोड़कर मिलिए शूटर दादी से 

2 of 8
मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
उम्र का हवाला देकर जो लोग वक्त के सामने हिम्मत हार जाते हैं, उनके लिए जौहड़ी गांव की प्रकाशो तोमर एक प्रेरणा हैं। उन्होंने 65 की उम्र पार होने के बाद निशानेबाजी सीखी और कई प्रतियोगिताओं में पदक जीते। उनके सटीक निशाने को देखकर बड़े-बड़े दिग्गज दांतो तले अंगुलिया दबा लेते हैं। 
विज्ञापन

दादी ने साबित किया कि सफलता की मोहताज नहीं उम्र

3 of 8
शूटर दादी प्रकाशो तोमर
कहते हैं उम्र सफलता की मोहताज नहीं। जज्बा और लगन हो तो मंजिलें कदम चूम ही लेती हैं। जौहड़ी की शूटर दादी की सफलता उम्र की मोहताज नहीं रहीं हैं। घर से निकली और विदेशों तक वह खेल प्रेमियों के लिए प्रेरणा बन गई। उम्र का हवाला देकर मैदान से हटने वाली महिलाओं के लिए वह संबल बनी हुई है। 

60 साल की उम्र में रिवॉल्वर थामी फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा

4 of 8
शूटर दादी प्रकाशो तोमर
प्रकाशो तोमर का जन्म 1936 में हुआ था और 19 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी। वह आठ बच्चों की मां और परिवार के सत्रह बच्चों की दादी हैं। शूटर दादी प्रकाशो ने 60 साल की उम्र में रिवाॅल्वर थामी और वह लगातार मशहूर होती चलीं गईं। अब तक वह देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। उन्हें ढेरों सम्मान मिल चुके हैं। 

 
विज्ञापन

निशाना सही लगा तो शौक जुनून में बदल गया

5 of 8
शूटर दादी
शूटर दादी के अनुसार उनकी पोती अकेले शूटिंग रेंज में जाने से डरती थी तो उन्होंने अपनी पोती के साथ चलने के लिए। वह उसके साथ शूटिंग रेंज में जाने लगीं। वहां लड़के भी शूटिंग प्रैक्टिस किया करते थे। वहां सभी ने मुझे भी शूटिंग में हाथ आजमाने को कहा। एक दिन दादी ने भी निशाना लगाने की कोशिश की तो निशाना सही लगा। बस फिर तो हर रोज दादी को निशाना लगाने का शौक चढ़ा और ये शौक जल्द ही जुनून बन गया।
 
विज्ञापन

लगातार अभ्यास ने बनाया शार्प शूटर

6 of 8
शूटर दादी प्रकाशो तोमर
शूटर दादी लगातार शूटिंग का अभ्यास करने लगी। अपने एक इंटरव्यू में दादी ने बताया कि वह अपने हाथ को और स्थिर करने के लिए जग में पानी भरतीं और इस जग को कई घंटे पकड़कर खड़ी रहती थीं। वह इससे ऐसे अभ्यास करतीं जैसे कि राइफल या पिस्टल पकड़ी जाती है। उन्होंने तकरीबन एक साल  तक घर का काम करने के बाद ये अभ्यास किया जिससे उनका हाथ मजबूत हो गया।

 
विज्ञापन

...जब डीआईजी बोले, औरत के सामने बेइज्जती हो गई

7 of 8
शूटर दादी प्रकाशो तोमर
दादी प्रकाशो तोमर के अनुसार एक साल बाद उनका दिल्ली में मैच हुआ। एक डीआईजी से उनका इस मैच में मुकाबला होना था। डीआईजी को हराकर दादी ने गोल्ड मैडल जीत लिया। इस पर डीआईजी बोले कि औरत के सामने मेरी बेइज्जती हो गई। 
विज्ञापन

बेटी और पोती भी हैं अंतरराष्ट्रीय शूटर

8 of 8
शूटर दादी प्रकाशो तोमर
वह बताती हें कि उनकी सफलता के बाद गांव का माहौल बदला। उन्हें देखकर गांव की 30 लड़कियों ने शूटिंग रेंज में प्रवेश लिया जिनमें से आज कुछ लड़कियां इंटरनेशनल लेवल पर खेलती हैं। उनकी बेटी सीमा तोमर ( भारतीय सेना ) और पोती रूबी तोमर ( सब इंसपेक्टर - पंजाब पुलिस ) भी  अंतरराष्ट्रीय की शूटर है।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें