मेरठ के गोल्डन ब्वॉय यानी सौरभ चौधरी ने केरल के तिरुवनंतपुरम में आयोजित 62वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में जूनियर एवं सीनियर संयुक्त स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है। कलीना गांव निवासी शूटर सौरभ चौधरी ने 10 मीटर एयर पिस्टल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डंका बजाया है। कोच अमित श्योरान ने बताया सौरभ चौधरी ने गाजियाबाद की देवांशी धामा के साथ मिलकर 10 मीटर एयर पिस्टल जूनियर एवं सीनियर वर्ग की संयुक्त स्पर्धा में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीता है। आगे जानिए आखिर कैसे उन्होंने हासिल की ये उपलब्धि :-
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सौरभ चौधरी की जीत का जश्न मनाते खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ के कोच अमित श्योराण ने बताया कि सौरभ ने एकाग्रता और निरंतरता से यह कामयाबी हासिल की। सौरभ देश के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में है और बागपत को उस पर नाज है। सौरभ चौधरी के पदक जीतने पर एकेडमी में मिठाई बांटी गई। दूसरी तरफ सौरभ के गांव कलीना में खुशी का माहौल है। भाई नितिन चौधरी ने कामयाबी पर खुशी जताई। साथ ही गांव में मिठाई बांटी।
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सौरभ चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ के कलीना गांव के 16 साल के निशानेबाज सौरभ चौधरी बागपत के बिनौली की वीर शाहमल शूटिंग एकेडमी में निशानेबाजी का अभ्यास करते है। इंडोनेशिया के जकार्ता में 21 अगस्त को 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने वाले होनहार ने पिछले दिनों में कई स्वर्ण पदक जीते हैं और खुद को विश्व स्तर पर साबित कर दिखाया।
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सौरभ चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ चौधरी की कामयाबी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। सिर्फ तीन साल की मेहनत के बाद किसान का यह बेटा 'गोल्डन ब्वाय' बन गया। अपने कोच अमित श्योराण की पिस्टल से साल 2015 में दिल्ली में आयोजित 59वीं नेशनल चैंपियनशिप में पहली बार यूथ वर्ग का गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद सौरभ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। परिवार ने साथ दिया और पिस्टल खरीदकर दी। सर्दी गर्मी बरसात हर मौसम में रोज 12 किमी का सफर टैंपो से करते हुए सौरभ कलीना से बिनौली तक जाता रहा और यहां करीब आठ घंटे तक नियमित अभ्यास करने से वह तपकर कुंदन बन गए।
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कोच अमित श्योराण व शूटर सौरभ चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ चौधरी के उसके भाई नितिन चौधरी बताते हैं मार्च 2015 में सौरभ चौधरी ने शूटिंग सीखने की इच्छा जताई। अप्रैल 2015 में बड़े भाई नितिन चौधरी सौरभ को लेकर बिनौली पहुंचे और कोच अमित श्योराण से मिलकर एडमिशन कराया। यहां से शुरू हुआ सौरभ चौधरी की मेहनत और सफलता का सिलसिला। रेंज पर पहली बार पिस्टल देखी। शुरूआत अभ्यास के बाद कोच अमित श्योराण ने सौरभ को अपनी पिस्टल से खेलने का अवसर दिया।
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घर में प्रैक्टिस करता था सौरभ
- फोटो : अमर उजाला
कामयाबी मिलनी शुरू हुई तो कोच और परिवार ने सौरभ की प्रतिभा को परख लिया। साल 2016 में करेल के त्रिवेंद्रम में यूथ खेलों में सौरभ ने स्वर्ण पदक जीतकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद उनकी सफलताओं का सिलसिला अब तक जारी है। कोच की पिस्टल से खेलने वाले सौरभ को परिवार ने किसी तरह करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर पिस्टल दिलाई।
बेटे के मेडल दिखातीं सौरभ चौधरी की मां
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अपनी पिस्टल से उन्हें बेहद लगाव है। सौरभ की मां बताती हैं कि वह जब भी जीतकर आता है तो घर में उसकी पसंद का खाना बनाया जाता है। उनके आने की खुशी में उनकी फेवरेट डिश के साथ रसगुल्ले बनाना नहीं भूलती क्योंकि उनके लाड़ले सौरभ को रसगुल्ले बेहद पसंद जो हैं।
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