योग के महागुरु
तिरुमलाई कृष्णमचार्य को 'आधुनिक योग का पितामह' कहा जाता है। उनका जन्म कर्नाटक के चित्रदुर्गा में 18 नवंबर, 1888 को हुआ था। वह आयुर्वेद और योग दोनों ही विद्या के बहुत अच्छे जानकार थे। कृष्णमचार्य ने हिमालय की गुफाओं में रहने वाले योगाचार्य राममोहन ब्रह्मचारी से पतंजलि योगसूत्र की बारीकियां सीखी थीं। उन्होंने छह वैदिक दर्शनों में डिग्री की। मैसूर के महराजा के राज में उन्होंने योग को बढ़ावा देने के लिए पूरे भारत का भ्रमण किया।
कृष्णमाचार्य अपनी धड़कनों पर काबू कर सकते थे। हठयोग और विन्यास को पुन: जीवित करने का पूरा श्रेय उन्हें ही जाता है। वह अपनी सांसो की गति पर नियंत्रण रख लिया करते थे। उनके शिष्यों में के.एस. अयंगर, के पट्टाभी जोस, ए.जी. मोहन, श्रीवास्ता रामास्वामी, दिलीपजी महाराज जैसे जाने-माने योग गुरु शामिल रहे।