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पांच ऐसे मंत्र जिसे अपनाने से जीवन में सफलता की ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं

Sun, 19 Nov 2017 07:22 AM IST
amarujala.com- Presented By: विनोद शुक्ला
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योग में पांच यम, पांच नियम, जैन परंपरा में पांच महाव्रत और बौद्ध धर्म के पांच शील प्रसिद्ध हैं। आज को दौर में उनके नए संस्करण जरूरी हैं। यम नियम और पंच महाव्रत या शील निजी जीवन को संस्कारित करने और सुगठित बनाने के लिए है। परंतु उनका शुद्धतम अर्थों में पालन करना कठिन है। बेहतर है कि पहले व्यावहारिक पंचशीलों को व्यवहार में शामिल रखा जाए। पारंपरिक योगसाधना में शामिल पंचशीलों को सरल अर्थों में समझना चाहें तो उन्हें श्रमशीलता, मितव्ययिता, शिष्टता, सुव्यवस्था और सहकारिता के नाम दे सकते हैं। 

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आराम करने के बजाए श्रम करने में बड़प्पन अनुभव करें। तत्परता और तन्मयता भरे परिश्रम से जोड़ कर दिनचर्या बनाई जाए।


 
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अमीरी के प्रदर्शन से सम्मान नहीं मिलता, ईर्ष्या ही उपजती है। लिहाजा कम खर्च में काम चलाते हुए सादा जीवन उच्च विचार का नीति को अपनाया जाए। जरूरतमंदों की सेवा में लगाएं।
 

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कहा जाता है कि शालीनता बिना मोल मिलती है, परन्तु उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है। इसलिए कठिन से कठिन परिस्थितियों में शालीनता का व्यवहार करना चाहिए।
 
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समय, श्रम, मनोयोग, जीवनक्रम, शरीर, सामर्थ्य का सुनियोजन करें। उन्हें ऐसे संभाल कर रखना चाहिए कि उनका समुचित लाभ उठाया जा सके।
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मिल-जुलकर काम करना। परिवार, कारोबार, लोकव्यवहार में, सामंजस्य, साथ-साथ काम करने की प्रवृत्ति बनी रहे। एकाकी और नीरसता, निराशा भरे वातावरण से बचें।
 
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