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Bhagavad Gita: इन गलतियों से व्यक्ति को जीवन में उठाने पड़ते हैं कष्ट, गीता में भी है इनका उल्लेख

Mon, 16 Jun 2025 01:06 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Bhagavad Gita: हिंदू धर्म में गीता को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके जरिए व्यक्ति जीवन जीने की कला और समस्याओं का निवारण करना सीखता है। 
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Life Lessons From The Bhagavad Gita - फोटो : adobe stock
Life Lessons From The Bhagavad Gita: हिंदू धर्म में गीता को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके जरिए व्यक्ति जीवन जीने की कला और समस्याओं का निवारण करना सीखता है। आमतौर पर बचपन से ही सभी को गीता का पाठ करने की सलाह दी जाती हैं, क्योंकि इसमें कर्म, धर्म और आत्म-ज्ञान का उल्लेख है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक मौजूद हैं, जिसका प्रत्येक पन्ना व्यक्ति को नई सीख और उसकी समझ को बढ़ाता है।

माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने गीता का पाठ अर्जुन को तब पढ़ाया था, जब उनके कदम युद्ध के लिए डगमगाने लगे थे। फिर श्रीकृष्ण की बातों को सुनकर अर्जुन अपने लक्ष्य को पूरा करने की ओर अग्रसर हुए। तभी से ऐसा माना गया है कि जीवन की विपरीत परिस्थितियों में मनुष्य को हमेशा गीता के उपदेशों का स्मरण करना चाहिए। इसके प्रभाव से न केवल आत्मशांति बल्कि नया नजरिया भी मिलता है। हालांकि श्रीमद्भगवद्गीता के मुताबिक इंसान की कुछ आदतें उसकी समस्याओं का मुख्य कारण भी बनती हैं।

इन आदतों के चलते वह अक्सर असंतुष्ट रहता है और गलत मार्ग की ओर चला जाता है। भगवद् गीता के अध्याय 16 के श्लोक 21 में तीन ऐसी चीजों का जिक्र हैं, जो मनुष्य के लिए नरक के द्वार खोलती हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
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Life Lessons From The Bhagavad Gita - फोटो : adobe stock
श्लोक

"त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्॥"
  • इसका अर्थ है कि कामना, क्रोध और लोभ यह तीनों ही नरक के द्वार हैं। इसलिए जीवन में हमेशा इनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
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Life Lessons From The Bhagavad Gita - फोटो : adobe stock
कामना
भगावन श्रीकृष्ण के मुताबिक अत्यधिक इच्छाएं व्यक्ति को गलत राह पर ले जाती हैं। कई बार कामनाए पूरी न होने के कारण मन परेशान और असंतुष्ट हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति झूठ और अधार्मिक कर्म की ओर जाने लगता है। साथ ही उसके मन में ईर्ष्या की भावना बढ़ने लगती हैं, जो उसके कष्ट का कारण बनती हैं। इसलिए जीवन में हमेशा इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए और सभी परिस्थितियों में आत्मसंयम बनाए रखें।
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Life Lessons From The Bhagavad Gita - फोटो : adobe stock
क्रोध 
श्रीकृष्ण के अनुसार क्रोध व्यक्ति की बुद्धि को प्रभावित करता है। अधिक क्रोध होने पर यह इंसान के विवेक को भी नष्ट कर देता है। इसके कारण मनुष्य हिंसा और अपशब्द को अपनाता है जिसकारण उसकी समस्याएं और भी बढ़ने लगती हैं। इसलिए जीवन में क्रोध करने से बचना चाहिए। यही नहीं विपरित परिस्थितियों में भी स्वयं को धैर्यवान बनाए रखें।
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Life Lessons From The Bhagavad Gita - फोटो : freepik
लालच 
लालच व्यक्ति को बुरे कर्म की ओर ले जाता है। इसके चलते वह स्वार्थी भी बनता है। श्रीकृष्ण के मुताबिक लालच न केवल तनाव बल्कि रिश्तों में दरार लेकर भी आता है। ये आदत व्यक्ति को अनैतिक कार्यों की ओर ले जाती है। इसके जरिए जितनी जल्दी इंसान धन अर्जित करता है उतनी ही तेजी से उसकी परेशानियां बढ़ती हैं, क्योंकि लालच हमेशा असंतुष्ट की भावना को बढ़ाता है। इसलिए मेहनत और अपनी लगन से प्राप्त हुई चीजों में ही स्वयं को संतुष्ट रखना चाहिए।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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