फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए देवी-देवताओं के वाहनों से कैसी मिलती है हमें सीख

Wed, 17 Mar 2021 11:57 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
विज्ञापन
1 of 10
प्रत्येक देवी -देवता का उनके स्वरुप ,आचरण और व्यवहार के अनुरूप ही उनका वाहन होता है। - फोटो : अमर उजाला
हिंदू धर्म शास्त्रों में अनेक देवी-देवताओं के स्वरुप और चरित्र का वर्णनं किया गया है। प्रत्येक देवी -देवता का उनके स्वरुप ,आचरण और व्यवहार के अनुरूप ही उनका वाहन होता है। हर देवता अपने वाहन के माध्यम से प्रकृति के एक विशिष्ट गुण का प्रतिनिधित्व करता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इन वाहनों के रूप में बहुत ही अद्भुत रहस्य और सूक्ष्म प्रेरणाएं छिपी हुई हैं जिनको जानकार व्यक्ति प्रकृति द्वारा दिए गए मूक संदेशों को भली-भाँति समझकर अपने जीवन में उतार सकता है।
विज्ञापन

2 of 10
मां दुर्गा
मां शेरावाली की सवारी है शेर
देवी भागवत के अनुसार माँ दुर्गा की सवारी सिंह वन में संयुक्त परिवार में रहने वाला प्राणी है। यह वन का सबसे शक्तिशाली प्राणी होता है किंतु अपनी शक्ति को व्यर्थ में व्यय नहीं करता। आवश्यकता पड़ने पर ही इसका उपयोग करता है। देवी का वाहन शेर यह संदेश देता है कि घर के मुखिया को अपने परिवार को जोड़कर रखना चाहिए तथा व्यर्थ के कार्यों में अपनी शक्ति को न लगाकर घर को सुखी बनाने के लिए प्रयास करना चाहिए।
विज्ञापन

3 of 10
laxmi
उल्लू है श्री लक्ष्मी जी का वाहन 
उल्लू क्रियाशील प्रवृत्ति का पक्षी है, वह अपना पेट भरने के लिए भोजन की तलाश में निरंतर कार्य करता रहता है। इस कार्य को वह पूरी लगन के साथ करता है। लक्ष्मी के वाहन उल्लू से यही सीखने को मिलता है कि जो व्यक्ति दिन-रात मेहनत करता है, माँ लक्ष्मी की सदैव उन पर कृपा होती है तथा वे स्थाई रूप से मेहनती लोगों के घर में निवास करती हैं।
 

4 of 10
श्री गणेश का वाहन मूषक 
गणपति का वाहन मूषक अर्थात चूहा है। चूहे का स्वभाव है कि वह प्रत्येक वस्तु , चाहे वह काम की हो या बेकार  सबको कुतरकर क्षति पहुंचाता है। इसी प्रकार कुतर्की लोग भी हर कार्य में अपने कुतर्कों द्वारा व्यवधान उत्पन्न करते हैं। श्री गणेश ज्ञान एवं बुद्धि के देवता हैं तथा कुतर्क चूहा है जिसे गणेश जी ने अपनी सवारी बनाकर अपने नीचे दबा रखा है। इस बात से यह सन्देश मिलता है कि हमें बुरे लोगों की अर्थहीन बातों को हटाकर उनका दमन कर अपने विवेक से काम लेना चाहिए।
विज्ञापन

5 of 10
lord shiva
शिवजी का वाहन बैल 
शिव पुराण में शिवजी का वाहन बृषराज नंदी को बताया गया है। आम तौर पर खामोश रहने वाले बैल का चरित्र उत्तम और समर्पण भाव वाला होता है। बल और शक्ति के प्रतीक बैल को मोह-माया और भौतिक इच्छाओं से परे रहने वाला प्राणी माना जाता है। यह सीधा-साधा प्राणी जब क्रोधित होता है तो शेर से भी भिड़ जाता है। शिव की सवारी बैल से जन-जन को यही प्रेरणा मिलती है कि शक्तिशाली होने पर भी शांत एवं सहज रहना चाहिए व परिश्रम द्वारा जीवन में सदैव धर्म के मार्ग पर चलते रहना चाहिए।
विज्ञापन

6 of 10
lord vishnu
भगवान विष्णु के वाहन हैं गरुड़ 
गरुड़ ऐसा पक्षी है जो आकाश में बहुत ऊंचाई पर उड़कर भी पृथ्वी के छोटे-छोटे जीवों पर नज़र रख सकता है। गरुड़ साँपों का शत्रु होता है। इस कारण कहा जाता है कि यह विष को ख़त्म करने वाला अर्थात आतंक को नष्ट करने वाला पक्षी है। ऐसे ही परम शक्तिशाली भगवान विष्णु सबका पालन करने वाले हैं। उनकी नज़र प्रत्येक जीव पर होती है। विष्णु जी के वाहन से  सदैव अपनी दृष्टि पैनी बनाए रखने एवं जागरूक बने रहने की प्रेरणा मिलती है।
विज्ञापन

7 of 10
मां सरस्वती - फोटो : अमर उजाला
सरस्वती जी का वाहन है हंस 
हंस पवित्र, जिज्ञासु और समझदार पक्षी होने के साथ-साथ जीवनपर्यंत एक ही हंसनी के साथ रहता है। परिवार में प्रेम और एकता का यह उत्तम उदहारण है। इसके अलावा हंस के सामने दूध और पानी मिलाकर रख दें तो वह केवल दूध पी लेता है और पानी छोड़ देता है मतलब वह सिर्फ गुण ग्रहण करता है अवगुण छोड़ देता है। हंस मोती चुगकर सर्वश्रेष्ठ को ग्रहण करने का संदेश देता है।

8 of 10
Hanuman
हनुमान जी का आसान पिशाच 
हनुमानजी प्रेत या पिशाच को अपना आसन बनाकर उनपर बैठते हैं और इन्हीं को अपने वाहन के रूप में प्रयोग करते हैं। पिशाच या प्रेत बुराई तथा दूसरों को भय एवं कष्ट देने वाले होते हैं। इसका अर्थ है कि हमें बुराई व दुष्ट प्रवृति के लोगों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए।

9 of 10
भगवान सूर्य - फोटो : Social media
रथ पर सवार भगवान सूर्य
हमारी सृष्टि के साक्षात देवता माने जाने वाले भगवान सूर्य के रथ में सात घोड़े होते हैं जिन्हे शक्ति एवं स्फूर्ति का प्रतीक माना जाता है। भगवान सूर्य का रथ यह प्रेरणा  देता है कि हमें अच्छे कार्य करते हुए सदैव आगे बढ़ते रहना चाहिए , तभी जीवन में सफलता रूपी प्रकाश आता है।
विज्ञापन

10 of 10
माँ गंगा करती हैं सवारी मगर पर
शास्त्रों में माता गंगा का वाहन मगरमच्छ होने का उल्लेख मिलता है , इनके वाहन से यही संदेश मिलता  है कि जलीय जीव-जंतुओं को मारना नहीं चाहिए क्योंकि जल में रहने वाले हर प्राणी की पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन बनाए रखने की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनको मारना यानि प्रकृति से छेड़छाड़ करना जिसके परिणाम बहुत भयानक होते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें