आचार्य चाणक्य
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अहंकार से रहें दूर
चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अहंकार जैसे अवगुण से सदैव दूर रहना चाहिए। चाणक्य नीति कहती है कि जो व्यक्ति मधुर बोलता है, जिसका व्यवहार लोगों के साथ विनम्र रहता है, वह हर स्थान पर सम्मान प्राप्त करता है। अहंकारी व्यक्ति को सम्मान की प्राप्ति नहीं होती है। अहंकार के कारण व्यक्ति स्वयं को ऊंचा समझने लगता है, जिससे उसकी धीरे-धीरे उसकी प्रतिभा नष्ट होने लगती है। अहंकार के कारण सफलता भी नहीं टिकती है। इसलिए व्यक्ति को अहंकार का त्याग करना चाहिए अन्यथा यह आने वाले जीवन में दुखों का कारण बनता है।