नागार्जुन अपने समय के प्रख्यात रसायन शास्त्री थे। वह जब वृद्ध हो चले, तो राजा से कहा, प्रयोगशाला का काम बहुत बढ़ चला है। मुझे अपने काम के लिए एक सहायक की आवश्यकता है। राजा ने सुना और कुछ सोचकर कहा, कल मैं आपके पास दो युवक भेजूंगा। उनमें से जिसे आप उपयुक्त समझें, उसे चुन लीजिएगा। अगले दिन सुबह दो नवयुवक नागार्जुन के पास पहुंचे। दोनों ही समान रूप से योग्य थे। नागार्जुन के सामने समस्या उठी कि किसे चुनें?
उन्होंने दोनों को एक-एक पदार्थ दिया और कहा, स्वयं पहचानो कि यह क्या है? फिर इसका कोई रसायन बनाकर लाओ। मैं परसों तुम्हारी प्रतीक्षा करूंगा। दोनों युवक पदार्थ लेकर उठ खड़े हुए। तब नागार्जुन ने कहा, घर जाने के लिए तुम्हें पूरा राजमार्ग तय करना होगा। दोनों नवयुवक शर्त सुनकर हैरत में पड़ गए।
तीसरे दिन सायं दोनों नवयुवक यथासमय नागार्जुन के पास पहुंचे। उनमें से एक युवक काफी खुश दिखाई दे रहा था और दूसरा खामोश। पहला युवक रसायन लेकर आया था और दूसरा खाली हाथ। नागार्जुन ने उससे कारण पूछा, तो वह बोला, आपके आदेश अनुसार मैं राजमार्ग से गुजर रहा था कि अचानक मैंने देखा कि एक पेड़ के नीचे एक वृद्ध और बीमार व्यक्ति पड़ा दर्द से कराह रहा है। उसकी यह दशा मुझसे देखी न गई।
मैं उसे घर ले गया। उसकी चिकित्सा और सुश्रुषा में लग गया। इसलिए मैं रसायन तैयार नहीं कर सका। नागार्जुन ने इस युवक को अपना सहायक चुन लिया। नागार्जुन ने राजा को बताया कि मुझे राजमार्ग पर एक पेड़ के नीचे बीमार आदमी के बारे में पहले ही पता था। खुद उसे अपने पास लाने की सोच रहा था कि संयोग से ये दोनों युवक आ पहुंचे। तब मैंने उन्हें परखने के लिए राजमार्ग से ही जाने के लिए कहा।