आचार्य चाणक्य को उनके गुरु चणक से चाणक्य नाम प्राप्त हुआ था। इसके अलावा कई विषयों में परांगत होने के कारण वे विष्णु गुप्त और कौटिल्य के नाम से भी विख्यात थे। ये राजनीति और कूटनीति में कुशल थे। इसके साथ ही ये अर्थशास्त्र के भी मर्मज्ञ थे। अर्थशास्त्र को मौर्य काल का दर्पण माना जाता था। इन्होंने अपनी शिक्षा विश्व में ख्याति प्राप्त तक्षशिला विश्वविद्यालय से ग्रहण की थी। इसके बाद यही पर आचार्य के पद पर रहते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा भी प्रदान की। आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन में हर तरह की परिस्थितियों का सामना किया था इसलिए वे शिक्षा और सफलता के मूल्य को भलिभांति समझते थे। उनके द्वारा लिखे गए नीतिशास्त्र में धन, व्यापार, शिक्षा, रिश्ते और शत्रु, जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। नीति शास्त्र में बताई गई बातों का अनुसरण करके व्यक्ति अपने जीवन की समस्याओं से मुक्ति पाने के साथ ही जीवन को सफल और सुखी बना सकता है। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में चार ऐसी आदतों के बारे में बताया है जो व्यक्ति की सफलता में रुकावट बनती हैं। यदि जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो इन अवगुणों का त्याग कर देना चाहिए।