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Chanakya niti: बच्चे को दिखानी हो सही राह तो उनकी आयु के अनुसार करें बच्चे के साथ व्यवहार

Wed, 19 May 2021 11:07 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक गुणवान व्यक्तित्व के निर्माण में शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कारों का होना बहुत आवश्यक होता है। बिना संस्कारों के शिक्षा का कोई महत्व नहीं रह जाता है। एक बालक को अच्छे संस्कार बालपन से ही दिए जाते हैं। बच्चे को अच्छे संस्कार देने में माता पिता की भूमिका सबसे अहम होती है इसलिए बच्चों से किसी भी तरह का व्यवहार करते हुए माता पिता को खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। चाणक्य नीति में बच्चों से व्यवहार करने से संबंधित महत्वपूर्ण बातें साझा की गई हैं। यदि इन बातों को ध्यान में रखा जाए तो बच्चों को सही तरीके से समझाया जा सकता है और उनको अच्छी सीख दे सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इस बारे में।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
पांच वर्ष लौं लालिये, दस लौं ताड़न देइ,
सुतहीं सोलह बरस में, मित्र सरसि गनि लेइ
चाणक्य नीति में इस दोहे के माध्यम से बताया गया है कि माता-पिता को किस आयु में बच्चे के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए। इस दोहे में कहा गया है कि पांच वर्ष की आयु तक बच्चे को खूब लाड़ प्यार करना चाहिए, क्योंकि इस आयु में बालक अबोध होता है। उसे सही और गलत का भान नहीं होता है। इस आयु में की गई गलती जानबूझकर नहीं होती है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : social media
जब बालक पांच वर्ष का हो
चाणक्य नीति कहती है कि जब बालक की आयु पांच वर्ष की हो जाए तो उसे गलती करने पर डांटा जा सकता है क्योंकि इस समय से वह चीजों को समझना शुरू कर देता है, इसलिए बच्चे को आवश्यकता पड़ने पर दुलार करने के साथ डांटना भी चाहिए।

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
10 से 15 साल वर्ष के बालक से व्यवहार
चाणक्य नीति कहती है कि जब बच्चा 10 वर्ष से लेकर 15 वर्ष का हो तो उसके साथ थोड़ी सख्ती की जा सकती है क्योंकि इस आयु में बच्चे हठ करने लगते हैं। यदि बच्चा कोई गलत तरह का व्यवहार और हठ करता है तो उसके साथ थोड़ा सख्त व्यवहार किया जा सकता है लेकिन माता पिता को बच्चों से व्यवहार करते समय भाषा को बहुत ही मर्यादित रखना चाहिए और संयम बरतना चाहिए।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
16 वर्ष की आयु में बच्चे से कैसा हो व्यवहार
चाणक्य नीति कहती है कि जब बच्चा 16 वर्ष का हो तो उसे मारने या डांटने के बजाय एक दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए क्योंकि इस आयु में बच्चे में बहुत से बदलाव होने लगते हैं। यह उम्र बहुत ही नाजुक होती है। इस आयु में बच्चे को एक दोस्त की तरह समझाकर उसकी गलती का अहसास करवाना चाहिए।
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