मानसिक स्वास्थ्य के लिए भगवद गीता श्लोक
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5. कर्म में योग (गीता 2.50)
श्लोक- “
योगः कर्मसु कौशलम्”
भावार्थ- अपने कर्मों में संतुलन और कुशलता बनाए रखने वाला ही सच्चा योगी होता है।
अनुप्रयोग- छोटे कार्यों को पूरी तन्मयता से करें। लेखन, सेवा, संगीत या किसी रचनात्मक कर्म से मानसिक शांति पाएं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।