मृत्यु के बाद स्थूल शरीर तो जहां का तहां रह जाता है लेकिन सूक्ष्म शरीर यमदूतों के द्वारा यमलोक ले जाया जाता है। जिसके बारे में गरुड़ पुराण, कठोपनिषद, विष्णु पुराण में उल्लेख मिलता है। गरुड़ पुराण में तो भगवान विष्णु अपने वाहन गरुड़ को यमलोक के मार्ग, यमराज, नर्क लोक की रूप रेखा, नर्क में मिलने वाली सजा और पुनर्जन्म के बारे में भी बताते हैं। लेकिन इन सबसे हटकर कुछ ऐसे रहस्य भी हैं जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे।
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मरने के बाद इसी रास्ते से यमदूत ले जाते हैं आत्माओं को
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यमलोक
मरने के बाद तो हर व्यक्ति और जीव की आत्मा यमलोक में पहुंचती है लेकिन आप चाहें तो यमलोक जाने वाले मार्ग पर जीते जी अपने शरीर के साथ जा सकते हैं और अगर आपका कलेजा मजबूत है तो आप उस स्थान को भी देख सकते हैं।
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यमराज
हिमाचल प्रदेश जिसे देवभूमि के रूप में जाना जाता है यहां चंबा जिले के भारमौर नामक स्थान पर यमराज का एक मंदिर है। कहते हैं यमदूत मरने के बाद आत्माओं सबसे पहले यहीं पर लेकर आते हैं।
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यमराज
घर की तरह दिखने वाला यह मंदिर रहस्यों से भरा पड़ा है। कुछ लोग यहां आकर भी अंदर जाने का साहस नहीं जुटा पाते हैं। मंदिर में एक खाली कमरा है जिसे यमराज के सचिव चित्रगुप्त का कमरा कहा जाता है।
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यमराज
यमराज के इस मंदिर को यमराज की कचहरी के नाम से भी लोग जानते हैं। इसके पीछे एक विचित्र मान्यता है। कहते हैं यमदूत जब आत्माओं को लेकर आते हैं तब यमराज का यहां दरबार लगता है और और यमराज व्यक्ति की आत्मा को उनके कर्मों के अनुसार अपना फैसला सुनाते हैं। इसके बाद आत्माओं को उनके कर्मों के अनुसार यहां से नर्क और स्वर्ग भेजा जाता है। इस मंदिर में आने के बाद आपके सामने से एक और बड़े रहस्य का पर्दा हटेगा।
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हिमाचल
कहते हैं कि इस मंदिर में चार अदृश्य द्वार हैं जो चारों दिशाओं में हैं। व्यक्ति की आत्मा को उनके कर्मों के अनुसार यमदूत अलग-अलग द्वार से लेकर जाते हैं। गरुड़ पुराण में भी यमराज के दरबार में मौजूद इस तरह के चार द्वारों का जिक्र किया गया है।
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yamlok
यह चारों द्वार सोने, चांदी, तांबा और लोहे के बने हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार धर्मात्मा व्यक्ति सोने, चांदी के द्वार से जाते हैं। तांबे के द्वार से ऐसे लोग जाते हैं जिनके कर्म सामान्य होते हैं। पापियों की आत्मा को लोहे के द्वार से लेकर यमदूत जाते हैं जो नर्क की ओर जाता है।