10 नवंबर, शुक्रवार को भगवान शिव के अवतार माने जाने वाले कालभैरव भगवान की जयंती है। अगहन महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान शिव के अंश कालभैरव की उत्पत्ति हुई थी। शिव पुराण में कहा है कि भैरव शंकर के ही रूप हैं और इनकी पूजा से घर में नकारत्मक ऊर्जा, जादू-टोने, भूत-प्रेत आदि का भय नहीं रहता।
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कालभैरव भगवान शिव के अंश होने के कारण भैरव अष्टमी पर बाबा भैरव की पूजा करने से सारे कष्ट मिट जाते है और जाने -अनजाने में हुए सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है।
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ऐसी मान्यता है काल भैरव की पूजा करने और व्रत रखने से सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है साथ ही भूत पिशाच का कभी डर नहीं रहता है। इस दिन काल भैरव को खुश करने के लिए काले कुत्ते को रोटी जरूर खिलानी चाहिए इसे शुभ माना जाता है।
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यदि आप बाबा काल भैरव की कृपा चाहते है तो अष्टमी के दिन बाबा कालभैरव के मंदिर में जाकर उनकी प्रतिमा पर सिंदूर और तेल चढ़ाए और मूर्ति के सामने बैठकर काल भैरव मंत्र का जाप करें।
बाबा कालभैरव की उत्पत्ति भगवान शिव के अंश के रूप में हुई थी इसलिए इस दिन 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ऊं नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। ऐसा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।
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